ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दूंगा, US-Iran डील पर बोले नेतन्याहू; कहा- यही मेरी जिंदगी का मिशन
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और समझौते की खबरों के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी समझौता हो जाए, ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।
नेतन्याहू ने इसे अपनी जिंदगी का मिशन बताया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठे समझौते पर सवाल
15 जून को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेतन्याहू से अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लेकर सवाल पूछे गए।
इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि इजरायल को अभी तक समझौते की सभी शर्तों की पूरी जानकारी नहीं मिली है।
हालांकि उन्होंने अमेरिका और इजरायल द्वारा चलाए गए सैन्य अभियान को बड़ी सफलता बताया और दावा किया कि इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
‘यही मेरी जिंदगी का मिशन है’
नेतन्याहू ने कहा,
“समझौता हो या न हो, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। न आज, न कल। जब तक मैं इजरायल का प्रधानमंत्री हूं, ऐसा नहीं होने दूंगा। यही मेरी जिंदगी का मिशन है।”
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायल के भीतर भी युद्ध और समझौते को लेकर बहस तेज हो गई है।
अपनी ही सरकार में घिरे नेतन्याहू
युद्ध समाप्ति के तरीके को लेकर नेतन्याहू को विपक्ष ही नहीं बल्कि अपनी सरकार के कुछ
सहयोगियों की आलोचना का भी सामना करना पड़ रहा है।
आलोचकों का कहना है कि अमेरिका ने युद्ध रोकने के लिए दबाव बनाया
और इजरायल को कई मामलों में वॉशिंगटन की रणनीति स्वीकार करनी पड़ी।
इजरायल ने गिनाईं सैन्य उपलब्धियां
नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायली सेना ने ईरान के कई परमाणु ठिकानों,
मिसाइल फैक्ट्रियों और सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।
उनके अनुसार अभियान के दौरान ईरान के कई शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों को भी निशाना बनाया गया।
उन्होंने कहा कि यह इजरायल के इतिहास के सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक था।
सरकार बदलना कभी आधिकारिक लक्ष्य नहीं था
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब उनसे पूछा गया कि तीन महीने की लड़ाई के बावजूद ईरान की सरकार अभी भी सत्ता में है,
तो नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि शासन परिवर्तन कभी इजरायल का आधिकारिक लक्ष्य नहीं था।
उन्होंने कहा कि अभियान के तीन मुख्य उद्देश्य थे:
- ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना
- बैलिस्टिक मिसाइल खतरे को कम करना
- ऐसे हालात बनाना कि ईरान की जनता खुद बदलाव चाहें तो कर सके
ट्रम्प के साथ रिश्तों पर भी दिया जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ संबंधों को लेकर उठ रहे सवालों पर नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी का रिश्ता है।
उन्होंने कहा,
“अमेरिका में लोग कहते हैं कि ट्रम्प मेरी बात मानते हैं, जबकि इजरायल में कहा जाता है कि मैं ट्रम्प की बात मानता हूं। दोनों बातें गलत हैं।”
अमेरिका-ईरान समझौते पर रखी नजर
नेतन्याहू ने अमेरिका-ईरान समझौते की खुली आलोचना करने से बचते हुए कहा कि यह समझौता अमेरिका का फैसला है।
हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि इजरायल अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहेगा और जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
मध्य पूर्व की राजनीति पर टिकी दुनिया की नजर
अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच चल रहे घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
आने वाले दिनों में जेनेवा में प्रस्तावित औपचारिक हस्ताक्षर और समझौते का पूरा विवरण सामने आने के बाद क्षेत्रीय राजनीति की दिशा और स्पष्ट हो सकेगी।















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