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यूक्रेन का मॉस्को पर बड़ा ड्रोन हमला, तेल रिफाइनरी में लगी आग; वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता

मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर तीन दिनों में दूसरा हमला, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराया संकट

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को पर अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक को अंजाम दिया

है। 18 जून को हुए इस हमले में मॉस्को ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया, जिससे परिसर में भीषण आग लग गई और

आसमान में काला धुआं फैल गया। यह रिफाइनरी क्रेमलिन से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

तीन दिनों में दूसरी बार बना निशाना

जानकारी के अनुसार 16 जून को भी इसी रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ था, जिससे इसकी लगभग 53 प्रतिशत प्रोसेसिंग

क्षमता प्रभावित हुई थी। इसके बाद 18 जून को फिर हुए हमले ने रिफाइनरी को और नुकसान पहुंचाया। यह संयंत्र रूस की

प्रमुख ऊर्जा कंपनी गज़प्रोम नेफ्ट द्वारा संचालित किया जाता है और सालाना 11 मिलियन टन से अधिक तेल का प्रसंस्करण करता है।

रूस ने सैकड़ों ड्रोन मार गिराने का दावा किया

मॉस्को के मेयर Sergei Sobyanin ने हमले की पुष्टि की है। रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि विभिन्न क्षेत्रों में कुल 555 ड्रोन

को मार गिराया गया, लेकिन इसके बावजूद कुछ ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे और रिफाइनरी के महत्वपूर्ण

हिस्सों को नुकसान पहुंचा।

यूक्रेन ने बताया जवाबी कार्रवाई

यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने इस अभियान को रूस की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ जवाबी कदम बताया।

उनका कहना है कि युद्ध को आर्थिक और लॉजिस्टिक समर्थन देने वाले बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना रणनीतिक रूप से जरूरी है।

मॉस्को क्षेत्र की ईंधन आपूर्ति पर असर की आशंका

मॉस्को ऑयल रिफाइनरी राजधानी और आसपास के क्षेत्रों के लिए ईंधन की प्रमुख आपूर्ति करती है।

लगातार दो हमलों के बाद इसकी उत्पादन क्षमता प्रभावित होने से घरेलू ईंधन आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिफाइनरी लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती

है। तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी वैश्विक महंगाई और ऊर्जा लागत को प्रभावित कर सकती है।

क्रिप्टो बाजार पर भी नजर

विश्लेषकों के अनुसार ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का असर जोखिम वाले निवेश साधनों पर भी पड़ सकता है।

बढ़ती ऊर्जा कीमतें मुद्रास्फीति और ब्याज दरों को प्रभावित कर सकती हैं, जिसका प्रभाव क्रिप्टोकरेंसी समेत वैश्विक वित्तीय बाजारों पर देखने को मिल सकता है।

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