सड़क है तो फुटपाथ भी होना चाहिए, पांच साल के बच्चे की मौत पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि नागरिकों को तय फुटपाथ पर चलने का मौलिक अधिकार मिलना चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत
प्रदत्त आवागमन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है और यह मोटर वाहनों से आवागमन के अधिकार से पहले आता है।
सड़क है तो फुटपाथ देना प्रशासन की जिम्मेदारी
जस्टिस P. S. Narasimha और जस्टिस Atul S. Chandurkar की पीठ ने कहा कि जहां भी सड़क है,
वहां सुरक्षित और सुव्यवस्थित फुटपाथ का निर्माण और रखरखाव करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अदालत ने कहा कि पैदल चलने वालों को सुरक्षित फुटपाथ और सड़क पार करने की सुविधाएं उपलब्ध कराना स्थानीय निकायों, नगर निगमों, नगरपालिकाओं और पंचायतों का अनिवार्य दायित्व है।
पांच साल के बच्चे की मौत से जुड़ा है मामला
यह मामला एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें स्कूल जा रहे पांच वर्षीय बच्चे की टैंकर की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
बच्चा अपने पिता के साथ पैदल स्कूल जा रहा था, तभी पीछे से आए टैंकर ने उसे कुचल दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि वहां सुरक्षित फुटपाथ और पैदल पारपथ (Pedestrian Crossing) मौजूद होते, तो संभवतः इस दुर्घटना को रोका जा सकता था।
पैदल चलने का अधिकार सबसे पहले
फैसले में जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने कहा कि मनुष्य ने पहियों का आविष्कार होने से बहुत पहले चलना शुरू किया था।
इसलिए संविधान के तहत आवागमन का पहला अधिकार पैदल चलने का है और इसे मोटर वाहनों के अधिकार से ऊपर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अदालत ने कहा कि समय के साथ सड़कें मोटर वाहनों के लिए केंद्रित हो गईं और पैदल यात्रियों को हाशिये पर धकेल दिया गया।
अब इस सोच को बदलने की आवश्यकता है।
केंद्र सरकार और लॉ कमीशन को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले की प्रति Ministry of Housing and Urban Affairs, Ministry of Rural Development,
Ministry of Road Transport and Highways
तथा Law Commission of India को भेजने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि पैदल चलने और फुटपाथ के अधिकार को लागू करने के लिए
एक स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करने की जरूरत है, जिससे जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय की जा सके।
हाईकोर्ट ने घटाया था मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाया
मृतक बच्चे के पिता ने 25 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने 7.82 लाख रुपये का मुआवजा दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने घटाकर 4.70 लाख रुपये कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाकर 11,44,628 रुपये कर दी
और दो महीने के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया।
पैदल चलने के अधिकार को बताया जीवन का हिस्सा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैदल चलना केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि जीवन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,
शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने के अधिकार से भी जुड़ा हुआ है।
इसलिए फुटपाथ पर सुरक्षित चलना संविधान द्वारा संरक्षित मौलिक अधिकार है।
















Leave a Reply