पेपर लीक के बाद दोबारा हुई परीक्षा में प्रॉक्सी कैंडिडेट और फर्जी बायोमेट्रिक कर्मचारियों की एंट्री, कई मेडिकल छात्र भी गिरफ्तार
पेपर लीक विवाद के बाद 21 जून को आयोजित NEET UG 2026 री-एग्जाम के दौरान बिहार के लखीसराय में बड़े सॉल्वर गैंग का खुलासा हुआ है।
पुलिस ने इस मामले में अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों में कई मेडिकल छात्र और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
प्रॉक्सी कैंडिडेट बनकर पहुंचे थे परीक्षा देने
पुलिस जांच में सामने आया है कि कुछ अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोग परीक्षा देने के लिए केंद्रों तक पहुंच गए थे।
आरोप है कि फर्जी पहचान और बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध लगाकर प्रॉक्सी उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाया गया।
2024 पेपर लीक मामले से जुड़ा है मुख्य आरोपी
पुलिस के अनुसार अर्पित राज नाम का मेडिकल छात्र इस नेटवर्क का कथित सरगना है।
वह ‘गया’ स्थित अन्नपूर्णा नारायण मगध मेडिकल कॉलेज का छात्र है।
अर्पित राज से NEET 2024 पेपर लीक मामले में भी सीबीआई पूछताछ कर चुकी है।
फर्जी कर्मचारी बनकर परीक्षा केंद्र पहुंचा छात्र
जांच के दौरान पटना मेडिकल कॉलेज के थर्ड ईयर एमबीबीएस छात्र मयंक कश्यप को पकड़ा गया।
आरोप है कि वह बायोमेट्रिक कंपनी का फर्जी कर्मचारी बनकर परीक्षा केंद्र में घुसा था।
पूछताछ में उसके खुलासों के बाद पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी की।
कई मेडिकल कॉलेजों के छात्र गिरफ्तार
जांच के दौरान बीएचयू की छात्रा पूनम कुमारी को दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़ा गया।
इसके अलावा AIIMS रायबरेली के छात्र सौरभ झा, दिल्ली के शाहदरा मेडिकल कॉलेज के इंटर्न अमन अग्रवाल
और एनएमसीएच नर्सिंग के छात्र संजीत समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
सुरक्षा के बावजूद सेंटर तक कैसे पहुंचे आरोपी?
NEET री-एग्जाम के लिए इस बार अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
प्रश्नपत्र एयरफोर्स के माध्यम से पहुंचाए गए, एआई आधारित निगरानी की गई, जैमर लगाए गए और देशभर में लाखों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।
इसके बावजूद आरोपियों का परीक्षा केंद्र तक पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जांच जारी, प्रशासन सतर्क
लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार और पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार स्वयं मामले की निगरानी कर रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों के नेटवर्क और अन्य संभावित लिंक की जांच जारी है।
कई मामलों में फोटो और फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ।















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