कैबिनेट में कानून संशोधन पर होगी चर्चा फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा के प्रावधान पर सरकार का फोकस
देशभर में पेपर लीक के मामलों पर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षा
(अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को और सख्त बनाने की तैयारी में है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक के दोषियों को 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में चर्चा होने की संभावना है।
मौजूदा कानून से कई गुना सख्त होंगे प्रावधान
वर्तमान कानून में पेपर लीक के दोषियों के लिए 3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
प्रस्तावित संशोधन लागू होने पर सजा और आर्थिक दंड दोनों को कई गुना बढ़ाया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य संगठित पेपर लीक गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
संसद में आ सकता है संशोधन विधेयक
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद सरकार मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह में परीक्षा संशोधन विधेयक संसद में पेश कर सकती है।
सरकार चाहती है कि कानून को जल्द लागू कर परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए।
पीएम मोदी ने दिए थे सख्त कार्रवाई के संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को जारी अपने वीडियो संदेश में कहा था कि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और सजा को सख्त करने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश देने की जानकारी भी दी थी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट को मिल सकते हैं अधिक अधिकार
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन में फास्ट ट्रैक कोर्ट को अधिक अधिकार देने पर भी विचार किया जा सकता है,
ताकि पेपर लीक से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा हो और दोषियों को समय पर सजा मिल सके।
NEET पेपर लीक पर जारी है विरोध प्रदर्शन
इस बीच, NEET 2026 पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है।
प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
इस आंदोलन को कई विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिला है। वहीं, 26 दिन तक भूख हड़ताल पर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन समाप्त कर चुके हैं।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने पर जोर
सरकार का कहना है कि नए संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, पेपर लीक की घटनाओं पर
रोक लगाना और लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
यदि प्रस्तावित संशोधन लागू होते हैं, तो यह देश में परीक्षा संबंधी अपराधों के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त कानूनी कदम माना जाएगा।
















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