बारिश के बीच सीएम आवास कूच
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर उत्तराखंड में सियासी घमासान तेज हो गया है।
सोमवार को कांग्रेस ने देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच किया।
तेज बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए।
हाथीबड़कला के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की।
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
प्रदर्शन में कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस ने इस प्रदर्शन के जरिए सरकार पर मामले में कार्रवाई का दबाव बनाने की कोशिश की।
राहुल गांधी पर एफआईआर वापस लेने की मांग
कांग्रेस का आरोप है कि हल्द्वानी में 08 अगस्त को खरगे की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल का कथित शुद्धिकरण किया गया।
पार्टी इसे सामाजिक भेदभाव और दलित सम्मान से जोड़कर विरोध कर रही है।
कांग्रेस की दूसरी प्रमुख मांग लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की है।
पार्टी का कहना है कि शुद्धिकरण मामले पर सवाल उठाने के बाद राहुल गांधी पर कार्रवाई की गई।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, कांग्रेस ने सात सितंबर के प्रदर्शन के लिए मुख्यमंत्री आवास तक मार्च का ऐलान पहले ही कर दिया था।
पार्टी ने मामले में कार्रवाई और राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर वापस लेने की मांग रखी थी।

मामला कैसे शुरू हुआ?
मल्लिकार्जुन खरगे ने आठ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को संबोधित किया था।
इसके दो दिन बाद दस अगस्त को श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों ने वहां हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया था।
इस घटना के बाद कांग्रेस ने इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग शुरू की।
मामला बाद में उत्तराखंड से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच गया।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने बयान वापस लिया
मामले में नया मोड़ तब आया, जब उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने शुद्धिकरण को लेकर अपने पुराने बयान पर सफाई दी।
उन्होंने पांच सितंबर को अपने 25 अगस्त के बयान से पीछे हटते हुए कहा कि उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रेस रिलीज जारी नहीं हुई थी।
इससे पहले भट्ट के कथित बयान को कांग्रेस ने शुद्धिकरण की घटना के समर्थन के तौर पर मुद्दा बनाया था।
विवाद के बीच बेंगलुरु में उनके और अन्य लोगों के खिलाफ जीरो एफआईआर भी दर्ज हुई है।
शुद्धिकरण मामले में हाईकोर्ट में PIL
विवाद अब न्यायिक स्तर तक भी पहुंच गया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट में इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई है।
याचिका में यह जांच कराने की मांग की गई है कि दस अगस्त को हुए कथित शुद्धिकरण का संबंध खरगे की जातिगत पहचान से था या नहीं।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 17 और जातिगत भेदभाव से जुड़े प्रावधानों का भी हवाला दिया गया है।
आज दिल्ली में कांग्रेस के दलित सांसदों की बैठक
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस के दलित सांसदों की सोमवार को दिल्ली में बैठक भी प्रस्तावित है।
बैठक में हल्द्वानी प्रकरण पर आगे की रणनीति और मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने पर चर्चा होगी।
पहले भी सचिवालय के बाहर हुआ था प्रदर्शन
इससे पहले एक सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देहरादून में सचिवालय की ओर मार्च किया था।
प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड पार करने की कोशिश में पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई थी।
उस दौरान पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत सड़क पर गिर गए थे। उन्हें उपचार के लिए दून अस्पताल ले जाया गया था।
कांग्रेस में शामिल हुए कई नेता
सोमवार के कार्यक्रम के दौरान कुमारी सैलजा और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में कई लोगों के पार्टी में शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है।
इनमें रुड़की के पूर्व मेयर यशपाल राणा, यमकेश्वर के पूर्व प्रमुख भुवनेश खर्कवाल, मनोज सैनी, पूर्व दर्जा राज्यमंत्री रामकुमार वालिया और रविंद्र आनंद सहित अन्य नाम शामिल हैं।

हरीश रावत ने दिल्ली में रखा मौन व्रत
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने दिल्ली स्थित अपने आवास पर एक घंटे का मौन व्रत रखा।
रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि वह छुआछूत और सामाजिक भेदभाव को संरक्षण देने वाली शक्तियों के खिलाफ संघर्ष में अपनी भागीदारी दर्ज करा रहे हैं।
राजनीतिक टकराव बढ़ने के संकेत
हल्द्वानी का यह विवाद अब कांग्रेस और भाजपा के बीच बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया है। कांग्रेस लगातार कार्रवाई और एफआईआर वापसी की मांग कर रही है।
वहीं, भाजपा कांग्रेस पर इस मामले को जातीय राजनीति से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगा रही है।
सोमवार को विकासनगर में भाजपा ने भी सामाजिक सौहार्द धरना देकर कांग्रेस पर निशाना साधा।















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