उत्तराखंड में बाघ संरक्षण से जुड़े कामों के लिए जारी करोड़ों रुपये खर्च
नहीं होने पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने चिंता जताई है।
केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के लिए Project Tiger के तहत पहली किस्त में
5.31 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की थी।
लेकिन 6 अगस्त 2026 तक राज्य सरकार इस राशि में से एक भी रुपया खर्च नहीं कर सकी थी।
इसका मतलब है कि जारी बजट के मुकाबले राज्य का खर्च शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया।
NTCA ने मुख्य सचिव को भेजा पत्र
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है।
प्राधिकरण के सदस्य सचिव एवं अपर महानिदेशक वन संजय कुमार ने 10 अगस्त को उत्तराखंड के मुख्य सचिव को पत्र भेजा।
पत्र में जारी धनराशि का समय पर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश देने को कहा गया है।
5.31 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2 जुलाई 2026 को उत्तराखंड के लिए मदर सेक्शन जारी किया था।
इसके बाद Project Tiger और Elephant योजना के तहत राज्य को पहली नेट रिलीज के रूप में 530.77 लाख रुपये मिले।
यह रकम करीब 5.31 करोड़ रुपये है, जिसका इस्तेमाल बाघ संरक्षण और टाइगर रिजर्व से जुड़े कार्यों में किया जाना है।
इस बजट से आवास प्रबंधन, निगरानी, बुनियादी ढांचे, वनाग्नि नियंत्रण और जल प्रबंधन जैसे काम किए जा सकते हैं।
भविष्य की फंडिंग पर पड़ सकता है असर
NTCA ने कहा है कि जारी राशि का समय पर उपयोग योजना के तहत आगे मिलने वाली फंडिंग के लिए जरूरी है।
लगातार कम खर्च होने की स्थिति में भविष्य में मिलने वाली केंद्रीय सहायता और बजटीय आवंटन पर असर पड़ सकता है।
समय पर बजट खर्च नहीं होने से टाइगर रिजर्व में संरक्षण और प्रबंधन से
जुड़े जरूरी काम भी प्रभावित होने की आशंका है।
खास तौर पर बाघों के साथ दूसरे वन्यजीवों, शिकार प्रजातियों और
उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं।

कॉर्बेट और राजाजी के लिए बजट अहम
उत्तराखंड में कॉर्बेट और राजाजी जैसे टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे में केंद्र से मिलने वाली राशि का समय पर इस्तेमाल संरक्षण
गतिविधियों को लगातार चलाने के लिए जरूरी माना जाता है।
राजाजी टाइगर रिजर्व के ऑनरेरी वार्डन राजीव तलवार ने भी कहा कि टाइगर रिजर्व में बजट की जरूरत काफी अधिक रहती है।
उन्होंने कहा कि कई जरूरी काम बजट की कमी के कारण प्रभावित होते हैं,
इसलिए उपलब्ध धनराशि का समय पर उपयोग होना चाहिए।
अब NTCA की आपत्ति के बाद वन विभाग के सामने 5.31 करोड़ रुपये की राशि का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने की चुनौती है।















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