धमाके से दहला इलाका, दो की मौत की आशंका
राजस्थान के चूरू जिले के रतनगढ़ क्षेत्र स्थित भानुदा गांव में मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा हुआ। भारतीय वायुसेना का एक ‘जगुआर’ फाइटर जेट क्रैश हो गया, जिससे पूरे इलाके में जोरदार धमाका हुआ।
इस दर्दनाक घटना में दो लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। हादसे के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और मौके पर पुलिस एवं प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सुबह अचानक तेज गर्जना सुनाई दी और देखते ही देखते आसमान में आग की लपटें व काले धुएं का गुबार दिखाई देने लगा।
शुरुआत में किसी को समझ नहीं आया कि यह क्या हो रहा है, लेकिन कुछ ही देर में स्पष्ट हो गया कि एक लड़ाकू विमान खेतों की ओर गिर गया है। विमान गिरने के तुरंत बाद गांव के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े और स्थिति की भयावहता सामने आई।
बताया जा रहा है कि क्रैश हुए जगुआर फाइटर जेट में दो पायलट सवार थे। फिलहाल पायलटों की स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय पुलिस और वायुसेना की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई है और जांच शुरू कर दी गई है। पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और वायुसेना अलर्ट मोड में आ गए हैं। रक्षा सूत्रों ने पुष्टि की है कि क्रैश हुआ विमान जगुआर था। हालांकि अभी तक सरकार या वायुसेना की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन उच्चस्तरीय जांच के आदेश जल्द दिए जा सकते हैं।
भारतीय वायुसेना का पुराना खतरनाक हथियार
‘जगुआर’ ब्रिटिश-फ्रेंच तकनीक से बना लड़ाकू विमान है, जिसे 1978 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। यह विमान DPSA (Deep Penetration Strike Aircraft) कैटेगरी में आता है, जो दुश्मन के इलाके में बेहद नीचे उड़ान भरते हुए गहरे हमले करने की क्षमता रखता है।
कम ऊंचाई पर उड़ान की यह क्षमता जहां इसे सामरिक दृष्टि से अहम बनाती है, वहीं इसमें गड़बड़ी होने पर यह बेहद खतरनाक साबित होता है, क्योंकि पायलट को प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम मिलता है।
इतिहास में निभाई थी अहम भूमिका
जगुआर फाइटर जेट ने कारगिल युद्ध के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसने दुश्मन के ठिकानों पर बमबारी की और कई महत्वपूर्ण मिशनों को अंजाम दिया। इसके अलावा यह विमान लंबे समय तक ‘रेकी मिशन’ यानी दुश्मन के इलाके की टोह लेने के लिए भी इस्तेमाल होता रहा।

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