अंकिता हत्याकांड: चांद की रोशनी से डी-एक्सलरेशन
अंकिता भंडारी हत्याकांड में पुलिस की जांच और अभियोजन की मजबूत पैरवी ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों को लगातार मजबूती दी।
एसआईटी की चार्जशीट में शामिल फॉरेंसिक, वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने
आरोपियों की ओर से बताई गई घटनाओं की कहानी पर गंभीर सवाल खड़े किए।
2025 में कोटद्वार की अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर
और अंकित गुप्ता को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
शुरुआत में बताई गई थी हादसे की कहानी
जांच के शुरुआती दौर में आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि अंकिता चीला नहर के किनारे से दुर्घटनावश पानी में गिर गई थी।
यह दावा भी किया गया कि घटना के समय पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी थी और पुलकित ने उसे बचाने की कोशिश की।
पुलिस के सामने चुनौती थी कि घटना के वास्तविक समय और परिस्थितियों को वैज्ञानिक तरीके से साबित किया जाए।
चांद की रोशनी ने खोल दी कहानी की एक और परत
घटना का समय रात करीब नौ बजे बताया गया था।
ऐसे में पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि उस रात ऋषिकेश क्षेत्र में चांद किस समय दिखाई दिया था।
इसके लिए केंद्रीय वेधशाला, कोलकाता से जानकारी मांगी गई।
जवाब में बताया गया कि उस रात क्षेत्र में चांद करीब 11 बजे दिखाई दिया था।
इस वैज्ञानिक जानकारी ने रात करीब नौ बजे पर्याप्त प्राकृतिक चांदनी होने के दावे को कमजोर कर दिया।
यानी आरोपियों की बताई कहानी का एक अहम हिस्सा वैज्ञानिक साक्ष्य से मेल नहीं खा रहा था।
डी-एक्सलरेशन थ्योरी से हादसे के दावे पर सवाल
पुलिस ने यह साबित करने के लिए भी वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा लिया कि अंकिता का नहर में गिरना महज दुर्घटना नहीं था।
डी-एक्सलरेशन थ्योरी के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति को ऊंचाई से पानी में जोर से धक्का दिया जाता है तो शरीर पानी तक पहुंचने के दौरान किनारे या दूसरी सतह से टकराए बिना सीधे पानी में जा सकता है।
पुलिस ने इसे घटनास्थल की परिस्थितियों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जोड़कर देखा।
शरीर पर चोट नहीं, हाथों पर मिले निशान अहम
पोस्टमार्टम में अंकिता के शरीर पर ऐसी जाहिरा चोटें नहीं मिलीं, जो नहर के किनारे से टकराकर गिरने की स्थिति में अपेक्षित हो सकती थीं।
वहीं उसके हाथों पर नील पड़ने के निशान मिले।
अभियोजन के अनुसार ये निशान इस संभावना की ओर इशारा करते थे कि उसके हाथों को मजबूती से पकड़ा गया था।
इन साक्ष्यों को घटनास्थल की परिस्थितियों और अन्य जांच से मिले तथ्यों के साथ जोड़कर पुलिस ने दुर्घटना की कहानी को चुनौती दी।
करीब 500 पन्नों की चार्जशीट में जुटाए गए साक्ष्य
सरकार के अनुसार एसआईटी ने मामले में करीब 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार की थी, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण साक्ष्य शामिल किए गए।
अभियोजन ने इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत के सामने घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की।
जांच में अंकिता के फोन कॉल और घटनाक्रम से जुड़े दूसरे साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना गया।
अभियोजन के मुताबिक, अंकिता ने घटना से पहले रिजॉर्ट से निकलने की इच्छा जताई थी और इसके बाद उसके साथ हुई घटनाओं की कड़ियां आरोपियों तक पहुंचती थीं।
कोर्ट में भी नहीं मिली राहत
30 मई 2025 को कोटद्वार की अदालत ने तीनों आरोपियों को अंकिता की हत्या
और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
इसके बाद आरोपियों ने सजा के खिलाफ अपील की और जमानत की मांग की।
19 अगस्त 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दो दिन चली सुनवाई के बाद
पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। तीनों फिलहाल उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
अब तक क्या हुआ
- 18 सितंबर 2022: अंकिता भंडारी की हत्या का मामला सामने आया।
- सितंबर 2022: पुलिस जांच के बाद मामला एसआईटी को सौंपा गया।
- एसआईटी जांच: करीब 500 पन्नों की चार्जशीट और लगभग 100 गवाहों के बयान शामिल किए गए।
- 30 मई 2025: कोटद्वार अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई।
- 2025-26: दोषियों की ओर से सजा और जमानत को लेकर कानूनी चुनौती जारी रही।
- 19 अगस्त 2026: हाईकोर्ट ने तीनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

















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