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अब DM के हाथ में नागरिकता का अधिकार, 8 राज्यों में बदली व्यवस्था

केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिलाधिकारी भी नागरिकता दे सकेंगे।

नई व्यवस्था के तहत पात्र आवेदकों को पंजीकरण या प्राकृतिककरण के जरिए भारतीय नागरिकता देने का अधिकार जिलाधिकारियों को दिया गया है।

यह व्यवस्था गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लागू होगी।

हालांकि, असम और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।

अब DM के पास होगी नागरिकता देने की शक्ति

नए नियमों के तहत जिलाधिकारी नागरिकता के लिए मिलने वाले आवेदन ऑनलाइन प्राप्त करेंगे और उनकी जांच करेंगे।

आवेदक के दस्तावेजों का सत्यापन करने के साथ जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी की अतिरिक्त जांच भी की जा सकेगी।

यदि जांच के बाद आवेदक पात्र पाया जाता है तो जिलाधिकारी भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

पहले नागरिकता से जुड़े ऐसे मामलों पर सशक्त समितियों और नामित अधिकारियों के स्तर पर फैसला लिया जाता था।

पहले से लंबित आवेदनों का क्या होगा?

जो आवेदन पहले से सशक्त समितियों या जिला स्तरीय समितियों के पास लंबित हैं, उन्हें अब संबंधित जिलाधिकारियों को भेजा जाएगा।

आवेदन जमा होने के बाद आवेदक को व्यवस्था के तहत स्वत: पावती भी उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके बाद जिलाधिकारी दस्तावेजों और आवेदक की पात्रता की जांच करके आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

सिर्फ ऑनलाइन आवेदन से नहीं मिलेगी नागरिकता

नए नियमों में आवेदक की व्यक्तिगत मौजूदगी को भी जरूरी रखा गया है।

आवेदक को आवेदन पर हस्ताक्षर करने और भारत के प्रति निष्ठा की शपथ लेने के लिए खुद उपस्थित होना होगा।

उचित अवसर दिए जाने के बावजूद यदि आवेदक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होता है तो जिलाधिकारी आवेदन खारिज कर सकते हैं।

इसका मतलब है कि केवल ऑनलाइन आवेदन करने से भारतीय नागरिकता हासिल नहीं होगी।

दस्तावेजों की जांच, पात्रता का सत्यापन और जरूरी पूछताछ के बाद ही नागरिकता देने की प्रक्रिया पूरी होगी।

किन राज्यों और क्षेत्रों में लागू होंगे नियम?

नई व्यवस्था गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा में लागू होगी।

इसके अलावा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जिलाधिकारियों को भी पात्र आवेदकों की नागरिकता संबंधी अर्जियों पर फैसला लेने का अधिकार दिया गया है।

हालांकि असम और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।

सरकार के इस बदलाव का उद्देश्य नागरिकता से जुड़े आवेदनों की जांच और निपटारे की प्रक्रिया को जिला स्तर पर अधिक प्रभावी बनाना है।


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