वेद मंत्रों से गूंजा ओंकारेश्वर मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर में विधिवत शुरू हुई प्रक्रिया
ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में पंच केदारों में द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर के कपाट खोलने की प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू हो गई है।
रविवार को भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव मूर्तियों को वेद ऋचाओं के साथ मंदिर के गर्भगृह से सभा मंडप में लाया गया।
श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर नये अनाज का भोग अर्पित कर विश्व शांति और समृद्धि की कामना की।
वेद मंत्रों और पूजा-अर्चना के बीच हुआ अनुष्ठान
इस पावन अवसर पर विद्वान आचार्यों और वेदपाठियों ने पंचांग पूजन के तहत देवी-देवताओं का आवाहन किया।
रावल भीमाशंकर लिंग के नेतृत्व में चल विग्रह मूर्तियों को गर्भगृह से सभा मंडप में लाया गया।
प्रधान पुजारी बागेश लिंग और शिव लिंग ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना, अभिषेक और आरती संपन्न की।
6 माह की यात्रा के लिए हुआ पुजारी का वरण
इस दौरान रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा मदमहेश्वर धाम के लिए 6 माह की पूजा हेतु प्रधान पुजारी शिव शंकर लिंग का वरण किया गया।
कपाट खुलने की यात्रा कार्यक्रम तय
18 मई को श्रद्धालु सभा मंडप में चल विग्रह मूर्तियों के दर्शन करेंगे।
इसके बाद 19 मई को डोली यात्रा ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना होगी।
यात्रा मार्ग इस प्रकार रहेगा:
- डगवाड़ी, ब्राह्मण खोली, मंगोलचारी
- सलामी, फापज, मनसूना, बुरूवा
- राऊलैंक, उनियाणा
- राकेश्वरी मंदिर रासी (रात्रि प्रवास)
आगे की यात्रा और कपाट खुलने की तिथि
20 मई को डोली रासी से प्रस्थान कर गौंडार गाँव पहुंचेगी।
21 मई को अंतिम चरण की यात्रा के बाद भगवान मदमहेश्वर के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे।
इसके बाद धाम में श्रद्धालुओं के दर्शन शुरू हो जाएंगे।
चारधाम यात्रा के साथ बढ़ी रौनक
ओंकारेश्वर मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना और जलाभिषेक कर रहे हैं।
पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल बना हुआ है।
श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी
इस अवसर पर मंदिर समिति के सदस्य, वेदपाठी, हक-हकूकधारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और आयोजन में भाग लिया।














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