मद्रास हाईकोर्ट ने वक्फ संपत्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी स्थान को
केवल इसलिए वक्फ संपत्ति नहीं माना जा सकता क्योंकि वह मुस्लिम धार्मिक स्थल है।
अदालत ने चेन्नई की 240 साल पुरानी एक दरगाह को वक्फ संपत्ति घोषित करने के तमिलनाडु वक्फ बोर्ड के आदेश को रद्द कर दिया।
क्या कहा हाईकोर्ट ने
मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति Govindarajan Thilakavadi ने अपने आदेश में कहा कि वक्फ अधिनियम के तहत
किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी संपत्ति का सर्वेक्षण, पंजीकरण और आधिकारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) आवश्यक है।
बिना इन प्रक्रियाओं के किसी धार्मिक स्थल को वक्फ संपत्ति नहीं माना जा सकता।
“हर कब्र या दरगाह वक्फ संपत्ति नहीं”
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हर कब्र या दरगाह स्वतः वक्फ संपत्ति नहीं बन जाती।
इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि वह संपत्ति मुस्लिम धार्मिक बंदोबस्त (एंडोमेंट) के रूप में स्थापित की गई थी।
अदालत ने यह भी कहा कि निजी पारिवारिक कब्रों और सार्वजनिक धार्मिक उद्देश्यों से संचालित दरगाहों के बीच कानूनी अंतर होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चेन्नई की 240 साल पुरानी दरगाह पर था विवाद
मामला चेन्नई स्थित सरकार सैयद हबीबुल्लाह शाह कादरी आरिफ रब्बानी हजरत दरगाह से जुड़ा है।
दरगाह के नियंत्रण को लेकर तमिलनाडु वक्फ बोर्ड और उसके मुतवल्ली (प्रबंधक) के बीच विवाद चल रहा था।
तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने अपने आदेश में दरगाह को वक्फ संपत्ति घोषित करते हुए तत्कालीन मुतवल्ली को हटाकर अपना कस्टोडियन नियुक्त कर दिया था।
क्या थीं दोनों पक्षों की दलीलें
वक्फ बोर्ड का दावा था कि जिस भूमि पर दरगाह स्थित है, वह पहले कब्रिस्तान के रूप में उपयोग होती थी
और धार्मिक एवं चैरिटेबल उद्देश्य से जुड़ी होने के कारण वक्फ संपत्ति मानी जानी चाहिए।
वहीं, हटाए गए मुतवल्ली ने अदालत में कहा कि वर्तमान भूमि का स्वामित्व लोक निर्माण विभाग (PWD) के पास है
और उन्होंने विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेकर दरगाह के लिए बिजली कनेक्शन भी प्राप्त किया है।
वक्फ बोर्ड के दावे को कोर्ट ने माना अपर्याप्त
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि संबंधित दरगाह का नाम वक्फ संपत्तियों की आधिकारिक सूची (औकाफ लिस्ट) में दर्ज नहीं है।
साथ ही वक्फ बोर्ड यह साबित करने में असफल रहा कि विवादित भूमि कानूनी रूप से वक्फ संपत्ति है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने तमिलनाडु वक्फ बोर्ड के आदेश को रद्द कर दिया।
फैसले के क्या हैं मायने
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।
अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का अधिकार तभी माना जाएगा
जब उसके वक्फ होने के पर्याप्त कानूनी और दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हों।

















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