अब चिप्स-फ्रेंच फ्राइज बनाकर होगी मार्केटिंग
50 लाख की लागत से स्थापित होगी यूनिट, SBI फाउंडेशन से मिला 25 लाख का अनुदान
चमोली जिले के गैरसैंण क्षेत्र में जल्द ही आलू प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किया जाएगा।
इस केंद्र में आलू से चिप्स, वेफर्स, भुजिया, फ्रेंच फ्राइज सहित विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
इसके बाद इन उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग भी की जाएगी।
यह पहल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) फाउंडेशन के सहयोग और भुवनेश्वरी महिला आश्रम के संसाधनों से शुरू की जा रही है।
किसानों और विशेषज्ञों के साथ हुई कार्यशाला
आलू आधारित उद्योग की स्थापना को लेकर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों, काश्तकारों, विभागीय अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यशाला में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, कृषि आधारित उद्योगों और किसानों की आय बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
कोऑपरेटिव मॉडल पर होगा संचालन
भुवनेश्वरी महिला आश्रम के प्रबंधक गिरीश डिमरी ने बताया कि इस परियोजना की अनुमानित लागत 50 लाख रुपये है,
जिसमें से 25 लाख रुपये का अनुदान SBI फाउंडेशन से प्राप्त हो चुका है।
उन्होंने बताया कि यूनिट शुरू होने के बाद इसे कोऑपरेटिव मॉडल पर संचालित किया जाएगा,
जिससे स्थानीय काश्तकारों को भी इसमें भागीदारी का अवसर मिलेगा
और उन्हें उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण एवं विपणन का लाभ भी मिल सकेगा।
गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर दिया गया जोर
कंडारीखोड़ गांव निवासी कौशल रावत ने कहा कि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के साथ अपनी जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन से बेहतर बाजार मूल्य मिलेगा और खेती युवाओं के लिए रोजगार का मजबूत माध्यम बन सकती है।
उन्होंने सरकार और पंचायतों से कृषि संसाधनों पर अधिक निवेश करने की भी अपील की।
उद्यान विभाग ने दी आधुनिक खेती की जानकारी
मेहलचौरी उद्यान विभाग के प्रभारी आशीष कुमार ने कहा कि अच्छी गुणवत्ता के बीज और वैज्ञानिक तरीके से कृषि दवाओं के उपयोग से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है और उनका लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
किसानों ने रखीं अपनी समस्याएं
रामगंगा किसान फेडरेशन गैरसैंण के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह रावत और त्रिलोक सिंह नेगी ने कहा कि किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्पादों की उचित कीमत और विपणन की है।
कई बार किसान फेडरेशन से तय समझौते के बजाय दूसरे स्थानों पर बिक्री कर देते हैं, जिससे सहकारी समितियों को नुकसान उठाना पड़ता है।
वहीं, दीपा देवी और लक्ष्मी देवी सहित कई महिला किसानों ने शिकायत की कि उन्हें कृषि योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र सिराणा के बुद्धे सिंह ने बताया कि जंगली जानवरों और पक्षियों के कारण सेब की खेती को भारी नुकसान हुआ।
सफल रही यूनिट तो खुलेंगी अन्य कृषि आधारित इकाइयां
परिवर्तन समिति के महेशानंद जुयाल ने कहा कि यदि गैरसैंण में आलू प्रसंस्करण यूनिट सफल रहती है,
तो भविष्य में क्षेत्र में अन्य कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयां भी स्थापित की जा सकती हैं।
इससे स्थानीय किसानों को स्थायी बाजार, बेहतर आय और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।















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