सलूड़–डुंग्रा में तैयारियां तेज
बैसाखी पर्व पर पंचांग गणना के बाद घोषित हुई तिथि, 12 दिनों तक चलेंगे धार्मिक अनुष्ठान
जोशीमठ (चमोली)। सीमांत पैनखंडा ज्योतिर्मठ क्षेत्र के सलूड़–डुंग्रा गांव में आयोजित होने वाला
विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर रम्माण का मुख्य समारोह इस वर्ष 26 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा।
बैसाखी के शुभ अवसर पर भूमि क्षेत्रपाल देवता मंदिर परिसर में पंचायत पुरोहित द्वारा पंचांग गणना के बाद शुभ मुहूर्त की घोषणा की गई।
भूमि क्षेत्रपाल देवता की भावुक विदाई
पौराणिक परंपरा के अनुसार, भूमि क्षेत्रपाल देवता अपने निशान और कंडियों के साथ ग्राम डुंग्रा
निवासी दिलवर सिंह कुंवर के घर से गाजे-बाजे के साथ अपने मूल मंदिर चोपता पहुंचे।
देवता की विदाई का दृश्य बेहद भावुक रहा, जहां परिवारजन वर्षभर की पूजा के बाद
अश्रुपूरित नेत्रों से अपने ईष्ट देवता को विदा करते नजर आए।
मंदिर पहुंचने पर देवता का पारंपरिक श्रृंगार किया गया और युवाओं द्वारा विशेष ताल पर देव निशान का नृत्य कराया गया।
12 दिनों तक चलेंगे अनुष्ठान और मुखौटा नृत्य
रम्माण महोत्सव के तहत आगामी 12 दिनों में:
- क्षेत्र के पांच प्रमुख मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान
- भूमि क्षेत्रपाल देवता का क्षेत्र भ्रमण
- पारंपरिक नृत्य कार्यक्रम
- रात्रिकालीन मुखौटा नृत्य (मास्क डांस)
का आयोजन विधि-विधान से किया जाएगा।
हजारों वर्षों पुरानी परंपरा, विश्व स्तर पर पहचान
रम्माण के संयोजक डॉ कुशल भण्डारी के अनुसार, यह एक प्राचीन धार्मिक अनुष्ठान है, जिसकी परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है।
मान्यता है कि यह आयोजन क्षेत्रीय ईष्ट देवता को प्रसन्न करने और उनके मनोरंजन के लिए किया जाता था, जो आज भी उसी श्रद्धा के साथ जारी है।
उन्होंने बताया कि 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य के ज्योतिर्मठ आगमन के दौरान इस परंपरा को विस्तार मिला।
दिल्ली विश्वविद्यालय कर रहा शोध
रम्माण की वैश्विक पहचान को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2025 से इस पर शोध कार्य किया जा रहा है।
शोधकर्ता और सहायक सलूड़–डुंग्रा गांव पहुंच चुके हैं और इस परंपरा का गहन अध्ययन कर रहे हैं।
साथ ही, उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा इस वर्ष रम्माण का अभिलेखीकरण भी किया जा रहा है।
विशिष्ट अतिथियों को भेजा गया निमंत्रण
आयोजन समिति ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया है, जिनमें:
- पुष्कर सिंह धामी
- सतपाल महाराज
- ऋतु खण्डूरी भूषण
- महेन्द्र भट्ट
- लखपत सिंह बुटोला
शामिल हैं।
















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