देहरादून-ऋषिकेश मार्ग के सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ कटान के विरोध के बीच हाथी कॉरिडोर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने देशभर के हाथी कॉरिडोर की मौजूदा स्थिति का नए सिरे से सर्वे कराने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्रालय से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है।
रिपोर्ट में कॉरिडोर में मौजूद बाधाओं और उन्हें दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।
कोर्ट ने हाथियों की प्राकृतिक आवाजाही को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है।
आदेश में कहा गया है कि हाथियों को उनके प्राकृतिक मार्ग से हटाने के लिए फायरबॉल, मशाल या किसी अन्य जबरन तरीके का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
हुल्ला पार्टियों पर भी जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने हाथियों को भगाने के लिए इस्तेमाल होने वाली हुल्ला पार्टियों पर भी विशेष ध्यान दिया है।
मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट में बताना होगा कि हुल्ला पार्टियों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है।
अब नए सर्वे और स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर हाथी कॉरिडोर की स्थिति की समीक्षा होगी।
सात मोड़ में पेड़ कटान को लेकर हुआ था विरोध
यह मामला देहरादून-ऋषिकेश नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण से भी जुड़ा है।
सात मोड़ क्षेत्र में सड़क विस्तार के लिए पेड़ कटान की प्रक्रिया शुरू होने पर स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था।
प्रदर्शनकारियों ने पेड़ों की कटाई रोकने और वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग उठाई थी।
आंदोलन के दौरान पर्यावरणीय नुकसान और हाथी कॉरिडोर प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।
विरोध बढ़ने के बाद सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ कटान पर रोक की बात भी सामने आई थी।
स्थानीय लोगों का कहना था कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए जंगल और वन्यजीवों की कीमत नहीं चुकाई जानी चाहिए।
सड़क परियोजना में वन्यजीवों के लिए प्रावधान
देहरादून-ऋषिकेश मार्ग के चौड़ीकरण में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही को ध्यान में रखने का दावा किया गया है।
परियोजना में एलिवेटेड रोड और अंडरपास जैसे प्रावधान शामिल हैं।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य वन्यजीवों को सड़क यातायात से प्रभावित हुए बिना आवाजाही का रास्ता देना है।
खासतौर पर हाथियों की आवाजाही को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।
इस परियोजना को लेकर वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया सहित विशेषज्ञ संस्थाओं से भी सुझाव लिए गए हैं।
सड़क के एलाइनमेंट और वन्यजीवों की आवाजाही को लेकर अलग-अलग स्तर पर अध्ययन किए गए हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाथी कॉरिडोर की वास्तविक स्थिति की नए सिरे से जांच होगी।
कॉरिडोर में मौजूद बाधाओं और उन्हें दूर करने के उपायों की भी समीक्षा होगी।
सात मोड़ में पेड़ कटान को लेकर हुए आंदोलन के बीच कोर्ट का यह निर्देश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब केंद्रीय मंत्रालय की स्टेटस रिपोर्ट पर सभी की नजर रहेगी।















Leave a Reply