चारु तिवारी
टिहरी रियासत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले
अमर सेनानी श्रीदेव सुमन का शहादत दिवस उत्तराखंड के इतिहास में साहस, त्याग और जनआंदोलन की प्रेरणा का प्रतीक है।
उनका बलिदान आज भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वालों को शक्ति और प्रेरणा देता है।
‘क्रिएटिव उत्तराखंड-म्यर पहाड़‘ पोस्टर श्रृंखला का पहला पोस्टर भी श्रीदेव सुमन को समर्पित था।
बाद में इसे नए स्वरूप में भी प्रकाशित किया गया। गढ़वाल के आदि गायक बादियों ने उनकी शहादत पर एक मार्मिक लोकगीत रचा, जो आज भी उत्तराखंड की लोकस्मृति में जीवित है।
श्रीदेव सुमन को समर्पित गढ़वाली लोकगीत
सड़की को सूत सुमन, सड़की को सूत ले,
टीरी मा पैदा ह्वेगे सुमन, सुमन सपूत ले!
गढ़ माता को प्यारे सुमन, सुमन सपूत ले!अखोडू को कीच सुमन, अखोडू को कीच,
ढंडक शुरू ह्वेगे सुमन, रंवार्इ का बीच!घाघरी को फेर सुमन, घाघरी को फेर,
गढ़माता की जिकुड़ी सुमन, पैनो लागे तीर!बजायो त घण सुमन, बजायो त घण,
मरि जाण बल सुमन, घर नी रण!नौ लखे हार सुमन, नौ लखे हार,
त्वैन शुरू करयाले सुमन, आजादी परचार।गांधी जी का चेला सुमन, कांटी जालो कूरो,
यो सुमन ढंडकी ह्वैगे, होर्इ जाणो सूरो!कपड़ा का गज सुमन, कपड़ा को गज,
आंगण का बीच सुमन, झंडा देन्द जस!घास काटे ज्वान सुमन, घास काटे ज्वान,
तेरा साथी छन सुमन, इसकूली ज्वान!देवता का भोग सुमन, देवता को भोग,
तेरा साथी छन सुमन, गौं-गौं का लोग!बाखुरी को कान सुमन, बाखरी को कान,
सुफल होइगे सुमन, तेरो स्यो बलिदान!गढ़माता की वीर सुमन, तेरो स्यो बलिदान!
श्रीदेव सुमन का बलिदान सदैव रहेगा प्रेरणा
श्रीदेव सुमन का जीवन और बलिदान उत्तराखंड के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है।
उनका संघर्ष केवल टिहरी रियासत के अत्याचारों के विरुद्ध नहीं था, बल्कि जनाधिकार, लोकतंत्र और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक भी था।
उनका अमर बलिदान आने वाली पीढ़ियों को अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने की प्रेरणा देता रहेगा।



















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