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सरोकारों से साक्षात्कार

मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं के लिए खुले आदिबदरी धाम के कपाट

ब्रह्म मुहूर्त में विधिवत पूजा-अर्चना, सात दिवसीय महाभिषेक समारोह का शुभारंभ

उत्तराखंड में आज आस्था और परंपरा का पर्व मकर संक्रांति पूरे श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है।

इसी पावन अवसर पर चमोली जिला स्थित आदिबदरी धाम के कपाट श्रद्धालुओं

के दर्शन के लिए विधिवत रूप से खोल दिए गए।

ब्रह्म मुहूर्त में संपन्न हुआ कपाट उद्घाटन

मकर संक्रांति की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पुजारी चक्रधर प्रसाद थपलियाल द्वारा मंदिर में विशेष अभिषेक पूजा कराई गई।

पूजा-अर्चना के उपरांत भगवान नारायण को भोग अर्पित किया गया और

पंचज्वाला आरती के साथ दर्शन व्यवस्था प्रारंभ हुई।

कपाट खुलते ही मंदिर परिसर “जय बदरी विशाल” के जयघोष से गूंज उठा।

फूलों से सजा धाम, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

मकर संक्रांति के अवसर पर मंदिर को लगभग दो क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया।

उल्लेखनीय है कि आदिबदरी धाम के कपाट पौष माह में लगभग एक माह के लिए बंद रहते हैं,

जिन्हें मकर संक्रांति के दिन पुनः खोलने की परंपरा है।

आदिबदरी धाम मंदिर समिति के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद बहुगुणा ने बताया

कि बुधवार तड़के सुबह 4 बजे कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोले गए, जिसके बाद बड़ी संख्या में भक्त दर्शन हेतु पहुंचे।

सात दिवसीय महाभिषेक व सांस्कृतिक आयोजनों की शुरुआत

कपाट खुलने के साथ ही मंदिर परिसर में सात दिवसीय महाभिषेक समारोह का शुभारंभ कर दिया गया है।

इसके अलावा महिला मंगल दलों, स्थानीय कलाकारों एवं स्कूली छात्र-छात्राओं

द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।

मंदिर समिति के अनुसार कपाट खुलने के बाद तीन दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे,

जबकि 20 जनवरी तक श्रीमद्भागवत कथा का वाचन किया जाएगा।

पंचबदरी में प्रथम धाम का विशेष महत्व

आदिबदरी धाम भगवान नारायण को समर्पित है, जिन्हें भगवान विष्णु का आदि स्वरूप माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार आदिबदरी को पंचबदरी में प्रथम धाम का स्थान प्राप्त है।

कहा जाता है कि बदरीनाथ धाम की यात्रा से पूर्व आदिबदरी के दर्शन करने से ही यात्रा पूर्ण और सफल मानी जाती है।

16 मंदिरों का समूह, अब शेष हैं 14

इतिहास में आदिबदरी मंदिर एक समय 16 मंदिरों के समूह के रूप में स्थापित था, जिनमें से अब 14 मंदिर शेष हैं।

परिसर में गरुड़, लक्ष्मी नारायण, सत्यनारायण, गणेश, हनुमान, गौरी शंकर, महिषासुर मर्दिनी,

सूर्य देव सहित भगवान विष्णु से जुड़े अनेक देवालय आज भी विद्यमान हैं, जो इस धाम को विशिष्ट आध्यात्मिक पहचान प्रदान करते हैं।

https://regionalreporter.in/uttarakhand-weather-alert-for-january-15-17/
https://youtu.be/Lp1q2miRn8U?si=YZZB3oU5quthpR2A

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