श्रीनगर गढ़वाल में आम नागरिकों और मातृशक्ति द्वारा 9 सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार जनआंदोलन किया गया।
इस दौरान महिलाओं ने शहर में रैली निकालते हुए अपनी मांगों को बुलंद आवाज में उठाया और “चाहे जो मजबूरी हो, मांग हमारी पूरी हो” जैसे नारों से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया।
रैली के जरिए प्रशासन तक पहुंचाई आवाज
प्रदर्शनकारियों ने पूरे शहर में रैली निकालते हुए एक बैनर के माध्यम से अपनी मांगों को सामने रखा।
महिलाओं का कहना था कि लंबे समय से इन मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।
9 सूत्रीय मांगों में उठे ये प्रमुख मुद्दे
- LUCC का भुगतान करो CBI जांच की समय सीमा निर्धारित करो जांच समय पर पूर्ण करो राज्य सरकार केंद्र सरकार पीड़ित नागरिकों की आर्थिक मदद करो।
- उत्तराखंड को नशा मुक्त करो, नशा नहीं जनता को रोजगार दो
- घरेलू एवं कमर्शियल एलपीजी गैस की शीघ्र अति शीघ्र व्यवस्थित तरीके से आपूर्ति करो महंगाई पर रोक लगाओ उत्तराखंड वासियों के लिए बिजली पानी मुफ्त करो।
- महिलाओं बच्चों की न्याय सुरक्षा सुनिश्चित करो अपहरण हुए मां, बहन, बेटियों और बच्चों को त्वरित सुरक्षित खोज लाओ प्रदेश भर में लगातार बढ़ रहे गोलीकांड हत्या, दहेज, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, अपहरण, मानव तस्करी, देह व्यापार बलात्कार जैसे जघन्य अपराध भू-माफियों, खनन माफियों, नशा माफियों, नकल माफियों भ्रष्टाचार पर रोक लगाओ कानून व्यवस्था दुरुस्त करो।
- देशभर में VIP कल्चर खत्म करो पद-कद धन, दौलत, वर्दी, सत्ता की धौंस बंद करो जनता के टैक्स का पैसों का दुरुपयोग राजनैतिक पार्टियों नेताओं हुकूमरानों जनप्रतिनिधियों नेताओं के परिवार पर करना बंद करो।
- स्वास्थ व्यवस्था दुरुस्त करो
- जंगली जानवरों के आतंक पर रोक लगाओ।
- आंगनबाड़ी बहनों की मांगे पूरी करो केशव थलवाल मामले की सीबीआई जांच करो जितेंद्र कुमार को न्याय दो।
- शिक्षा का निजीकरण बंद करो प्राइवेट स्कूलों की फीस स्कूल बसों का किराया कम करो सरकारी स्कूलों कासुधारीकरण कर आधुनिक शिक्षा से परिपूर्ण करो।
मातृशक्ति की एकजुटता बनी आंदोलन की ताकत
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द ठोस निर्णय लेने की अपील की।
यह जनआंदोलन क्षेत्र में बढ़ती समस्याओं के प्रति लोगों की जागरूकता और एकजुटता को दर्शाता है, जिसमें खासकर मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

















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