अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘वीआईपी’ (VIP) के चेहरे को लेकर चल रहे तीन साल पुराने अनसुलझे सवालों के बीच भाजपा ने
बड़ा सांगठनिक दांव खेला है। उत्तराखंड भाजपा के संगठन महामंत्री अजेय कुमार को उनके पद से हटा दिया गया है और
उन्हें राजस्थान जैसे बड़े राज्य का संगठन महामंत्री बनाकर नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है। राजनैतिक गलियारों में इस फैसले
को आगामी 2027 के चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा ‘डैमेज कंट्रोल’ माना जा रहा है।
नितिन नवीन के दावों और इस फैसले में बड़ा विरोधाभास
दिलचस्प बात यह है कि अजेय कुमार को राजस्थान भेजने का यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है
जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विशेष रूप से अपनी बातचीत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने का बड़ा दावा किया है।
नितिन नवीन ने संगठन के भीतर काम करने वाली महिलाओं और महिला पदाधिकारियों को भरोसा दिलाया है
कि उनकी मेहनत और अधिकारों के अनुसार जो भी उन्हें हासिल होना चाहिए, वह जरूर मिलेगा।
लेकिन राजनैतिक विश्लेषक नितिन नवीन के इन दावों को अंकिता भंडारी प्रकरण से जोड़कर देख रहे हैं।
सवाल उठ रहे हैं कि एक तरफ महिलाओं के सम्मान की बातें हो रही हैं,
तो दूसरी तरफ इतने गंभीर मामले में घिरे नेता को हटाने के लिए यह तरीका क्यों अपनाया गया?
कार्रवाई या सिर्फ ‘राजनैतिक स्वांग’?
उत्तराखंड के भीतर 2027 के चुनाव की रणनीति को लेकर भाजपा संगठन ने यह गहराई से महसूस किया है
कि अंकिता भंडारी प्रकरण आगामी चुनाव में पार्टी को भारी चुनावी नुकसान (Damage) पहुँचा सकता है।
ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में अजेय कुमार का उत्तराखंड के भीतर पद पर बने रहना इस नुकसान को और बढ़ा सकता था।
सूत्रों के अनुसार, उत्तराखंड के भीतर होने वाले इस राजनैतिक नुकसान को खत्म करने और राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम की
स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए ही अजेय कुमार को यहाँ से विदा किया गया है। लेकिन गंभीर आरोपों के बावजूद उन पर
कोई दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें राजस्थान जैसे बड़े राज्य की कमान सौंप दिए जाने को जनता और खासकर
महिला संगठन न्याय नहीं, बल्कि महिलाओं के आक्रोश को शांत करने के लिए रचा गया एक ‘राजनैतिक स्वांग’ (नाटक) कह रहे हैं।
गंभीर आरोपों के बीच राजस्थान रवानगी
गौरतलब है कि अंकिता के परिजनों ने सार्वजनिक तौर पर अजेय कुमार का नाम ‘वीआईपी’ के रूप में लिया था।
इसके बाद दिसंबर 2025 में एक कथित ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत कुमार गौतम और अजेय
कुमार के नामों का सीधा उल्लेख था। इतने संगीन और सार्वजनिक आरोपों के बीच अजेय कुमार को राजस्थान की कमान
सौंपकर भाजपा ने चुनावी नुकसान से बचने का रास्ता तो निकाल लिया है, लेकिन न्याय और नैतिकता पर गंभीर सवाल छोड़ दिए हैं।














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