बिड़ला परिसर में हुआ कार्यक्रम,
वक्ताओं ने बहुगुणा जी के व्यक्तित्व और योगदान को किया याद
हिमालय पुत्र स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की 107वीं जयंती के अवसर पर
Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University, श्रीनगर गढ़वाल के बिड़ला परिसर
स्थित एसीएल सभागार में स्मृति व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम से पूर्व विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में स्थापित स्व. बहुगुणा जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।
इसके बाद सभागार में दीप प्रज्वलन और प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।
अतिथियों का स्वागत और बहुगुणा जी के जीवन पर परिचर्चा
कार्यक्रम के संयोजक एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओम प्रकाश गुसाईं ने अतिथियों का स्वागत करते हुए
कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत की।
इस अवसर पर डॉ. कपिल पंवार ने स्वर्गीय Hemwati Nandan Bahuguna के जीवन, राजनीतिक और सामाजिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बहुगुणा जी के व्यक्तित्व की बहुआयामी विशेषताओं को रेखांकित करते हुए
उनके संघर्षपूर्ण जीवन और जनसेवा के योगदान को याद किया।
मुख्य वक्ता सोमवारी लाल उनियाल ने साझा किए संस्मरण
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता श्री सोमवारी लाल उनियाल ने अपने
संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उनका पहला परिचय बहुगुणा जी से श्रीनगर में हुआ था।
उन्होंने कहा कि बहुगुणा जी अत्यंत स्वाभिमानी व्यक्तित्व के धनी थे और अक्सर कहा करते थे—“कौन कहता है कि पहाड़ गरीब है।”
उन्होंने बताया कि बहुगुणा जी एक कुशल राजनेता होने के साथ-साथ बेहद स्पष्टवादी भी थे।
Indira Gandhi की एक सभा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बहुगुणा जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था-“हिमालय ने देश को पर्यावरण दिया है, अब वे बताएं कि देश ने हिमालय को क्या दिया।”
उत्तराखंड राज्य की अवधारणा से जुड़े थे बहुगुणा
उन्होंने कहा कि लगभग 17 वर्षों तक उनका बहुगुणा जी के साथ निकट जुड़ाव रहा।
एक पत्रकार के रूप में उन्होंने देखा कि उत्तराखंड के लिए अलग राज्य की अवधारणा बहुगुणा जी के चिंतन में प्रारंभ से ही मौजूद थी।
उनके प्रयासों से एक ही राज्य में दो बजट की व्यवस्था कर पर्वतीय क्षेत्रों के विकास हेतु पृथक बजट की परिकल्पना साकार हुई।
उन्होंने बहुगुणा जी को समाजवादी विचारधारा का सशक्त प्रतिनिधि बताते हुए उन्हें जननायक बताया।
कार्यवाहक कुलपति ने बताया दूरदर्शी चिंतक
कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यवाहक कुलपति प्रो. एन.एस. पंवार ने की।
उन्होंने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि दूरदर्शी चिंतक और जननायक थे।
उन्होंने शिक्षा, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय संतुलन के लिए जो नीतिगत हस्तक्षेप किए, वे आज भी प्रासंगिक हैं।
उच्च शिक्षा के विस्तार में रही महत्वपूर्ण भूमिका
संकाय अध्यक्ष नियुक्ति एवं प्रोन्नति प्रो. मोहन पंवार ने कहा कि बहुगुणा जी ने पर्वतीय समाज की समस्याओं को न केवल समझा, बल्कि उन्हें नीतिगत प्राथमिकता दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया।
मुख्य छात्र सलाहकार प्रो. एम.एम. सेमवाल ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि 1970 के दशक में बहुगुणा जी ने
शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए तथा उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के विस्तार हेतु
गढ़वाल और कुमाऊँ विश्वविद्यालयों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे शिक्षक, कर्मचारी और छात्र
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. राहुल बहुगुणा ने किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध साहित्यकार एवं पत्रकार प्रदीप डबराल,
प्रो. मंजुला राणा, प्रो. मंजू गुसाईं, प्रो. एम.सी. सती, प्रो. बी.पी. नैथानी, डॉ. अनुरागी, डॉ. नितिन सती,
डॉ. अरुण शेखर बहुगुणा, जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा सहित
विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, कर्मचारी, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


















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