अभिषेक रावत
कोदियाबगड़ में जुटेंगे हजारों लोग, पेशावर कांड के महानायक को याद करेगा उत्तराखंड
उत्तराखंड की वीरभूमि एक बार फिर स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी Veer Chandra Singh Garhwali को श्रद्धांजलि अर्पित करने जा रही है।
12 जून को दूधातोली स्थित कोदियाबगड़ में उनकी समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा,
जहां हजारों श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन जुटकर उन्हें नमन करेंगे।
निहत्थे सत्याग्रहियों पर गोली चलाने से किया था इनकार
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
वर्ष 1930 में पेशावर में तैनात गढ़वाल राइफल्स के जवानों को निहत्थे सत्याग्रहियों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया था।
लेकिन वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया।
उन्होंने अपने साथियों से कहा कि निहत्थे और अपने ही देशवासियों पर गोली नहीं चलाई जा सकती।
उनके इस साहसिक कदम ने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी और उन्हें गिरफ्तार कर कालेपानी की सजा दी गई।
अंडमान की जेल में झेली यातनाएं
अंग्रेजों ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को अंडमान-निकोबार की सेल्युलर जेल भेज दिया, जहां उन्होंने वर्षों तक कठोर यातनाएं झेलीं।
लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों और देशभक्ति से कभी समझौता नहीं किया।
यही कारण है कि आज भी उन्हें उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश में साहस और मानवीय मूल्यों के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
कोदियाबगड़ में हर साल लगता है श्रद्धांजलि मेला
दूधातोली के मनोरम बुग्यालों के बीच स्थित कोदियाबगड़ में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की समाधि है।
हर वर्ष 12 जून को यहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम और मेले का आयोजन किया जाता है।
स्थानीय लोगों के लिए यह स्थान केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि प्रेरणा और गौरव का प्रतीक है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ दी जाएगी श्रद्धांजलि
इस वर्ष भी नगर पंचायत गैरसैंण, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों के सहयोग से भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम में देशभक्ति गीत, गढ़वाली लोकगाथाएं और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के जीवन पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से कार्यक्रम में शामिल होकर स्वतंत्रता संग्राम के इस महानायक को श्रद्धांजलि देने की अपील की है।
कौन थे वीर चंद्र सिंह गढ़वाली
- जन्म: 1891, क्यूंठा गांव, पौड़ी गढ़वाल
- पद: गढ़वाल राइफल्स में हवलदार
- प्रसिद्धि: 1930 के पेशावर कांड के नायक
- सजा: कालेपानी (अंडमान-निकोबार)
- निधन: 1979
- संदेश: अहिंसा, मानवता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष
आज भी प्रेरणा देता है उनका जीवन
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का जीवन इस बात का प्रतीक है कि असली बहादुरी हथियार उठाने में नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने में होती है।
उनका संघर्ष और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, मानवता और साहस का संदेश देता रहेगा।

















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