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स्त्री शिक्षा से ही बनेगा समान और विकसित समाज

डीडीहाट में शैक्षिक संवाद गोष्ठी में मंथन

शैक्षिक दखल समिति के वार्षिक अधिवेशन में महिला शिक्षा, लैंगिक समानता और नेतृत्व में भागीदारी बढ़ाने पर हुई चर्चा

पिथौरागढ़ के डीडीहाट स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में आयोजित

शैक्षिक दखल समिति के वार्षिक अधिवेशन एवं स्थापना दिवस के अवसर पर स्त्री शिक्षा के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डायट प्राचार्य भास्करानंद पांडे ने की।

शिक्षा से ही संभव है समाज का विकास

प्राचार्य भास्करानंद पांडे ने कहा कि शिक्षा ही उचित नेतृत्व, समझ और विकास के मार्ग प्रशस्त करती है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में मानव समाज के शैक्षणिक विकास का गंभीरता से मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।

वक्ताओं ने माना कि समाज में महिला शिक्षा का महत्व बढ़ा है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

बालिकाओं की शिक्षा में सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार

शिक्षक एवं साहित्यकार महेश चंद्र पुनेठा ने आधार पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि बालिकाओं की शिक्षा में पहुंच, नामांकन, ठहराव और गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

परीक्षा परिणामों में भी बालिकाएं बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन विज्ञान, तकनीक, शोध, नेतृत्व और रोजगार के क्षेत्रों में उनकी भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है।

उन्होंने कहा कि माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का ड्रॉपआउट रेट अधिक है और समाज में मौजूद पूर्वाग्रह उनके आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं।

इसके समाधान के लिए लैंगिक धारणाओं को तोड़ने और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की जरूरत है।

समानता और जागरूकता पर वक्ताओं का जोर

सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए महिलाओं को अपने अधिकारों और अस्तित्व के प्रति जागरूक होना होगा।

वहीं पुरुषों को भी सहयोगी की भूमिका निभानी चाहिए।

डॉ. महेश बवाड़ी ने कहा कि बालकों को भी समानता और संवेदनशीलता की शिक्षा देना जरूरी है।

शिक्षक एवं चित्रकार मोहन चौहान ने कहा कि संवेदनशीलता ही बराबरी वाला समाज स्थापित कर सकती है।

वैज्ञानिक चेतना और स्त्री शिक्षा का गहरा संबंध

डॉ. निर्मल न्यौलिया ने कहा कि वैज्ञानिक चेतना और तार्किक समाज के निर्माण के लिए स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है।

डॉ. लोकेश डसीला ने कहा कि जिन समाजों में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक स्तर पर समान अधिकार मिले हैं, वहीं स्वस्थ समाज विकसित हुए हैं।

शिक्षा केंद्रित पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगी

कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य दुष्यंत पांगती, शिक्षक नेता गोविंद भंडारी और सेवानिवृत्त शिक्षिका राजेंद्री कन्याल मुख्य रूप से मौजूद रहे।

इस अवसर पर शैक्षिक दखल पत्रिका के सभी अंकों तथा शिक्षा केंद्रित पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

https://regionalreporter.in/nagarasu-gurdwara-dispute-rudraprayag-nihang-sikh-update/
https://youtu.be/UVlHuYkotc4?si=kMyoWtrXh9cNq0rs
जगदीश कलौनी
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