दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में पर्यावरण संरक्षण पर प्रेरक व्याख्यान, मैती आंदोलन की सफलता और नवाचारों पर डाला प्रकाश
देहरादून स्थित दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में 23 जुलाई 2026 को आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में
प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं मैती आंदोलन के प्रणेता डॉ. कल्याण सिंह रावत ‘मैती’ ने कहा कि प्रकृति संरक्षण
केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है।

चार दशक के अनुभव किए साझा
“पर्यावरण संरक्षण के अभिनव प्रयोग और अनुभव” विषय पर आयोजित व्याख्यान में डॉ. रावत ने पिछले
चार दशकों के अपने अनुभव, पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए नवाचार और समाज को प्रकृति से जोड़ने के
सफल प्रयासों को सचित्र प्रस्तुति के माध्यम से साझा किया।
उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील और सक्रिय बनने का आह्वान किया।
मैती आंदोलन की प्रेरक यात्रा
डॉ. रावत ने वर्ष 1995 में शुरू हुए विश्वप्रसिद्ध मैती आंदोलन की यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि विवाह जैसे
शुभ अवसर पर नवदंपति द्वारा पौधारोपण की परंपरा आज जनआंदोलन का रूप ले चुकी है।
उत्तराखंड से शुरू हुआ यह अभियान अब देश के कई राज्यों और विदेशों तक पहुंच चुका है तथा इसके माध्यम से लाखों पौधे लगाए जा चुके हैं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए कई नवाचार
व्याख्यान के दौरान उन्होंने चिपको आंदोलन, हिमालय बचाओ अभियान, जैव विविधता संरक्षण,
जलस्रोतों के पुनर्जीवन, वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े अनुभव साझा किए।
उन्होंने विद्यालयों में ईको क्लब, युवाओं की भागीदारी और जनजागरण अभियानों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
रानीचौरी में विकसित किया जैव विविधता वन
डॉ. रावत ने बताया कि उनके प्रयासों से रानीचौरी (टिहरी) में मैती शोध एवं जैव विविधता वन की स्थापना की गई,
जहां हजारों पौधों का रोपण कर हरित क्षेत्र विकसित किया गया है।
यहां पर्यावरण शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण और युवाओं के लिए स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।
पर्यावरण को उत्सव से जोड़ने की पहल
उन्होंने देवभूमि वृक्ष प्रसाद योजना, चाल-खाल पुनर्जीवन, बुग्याल संरक्षण अभियान, जलस्रोत संरक्षण,
लोक संस्कृति संरक्षण तथा वन मेला, हिमालयी पर्यावरण मेला और पर्यटन एवं पर्यावरण मेले
जैसे आयोजनों की जानकारी देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी और सामाजिक उत्सव से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम की शुरुआत में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी
चन्द्रशेखर तिवारी ने डॉ. रावत का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक इतिहासकार डॉ. योगेश धस्माना ने किया।
इस अवसर पर पर्यावरणविद्, लेखक, शोधार्थी, विद्यार्थी, बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का साझा दायित्व है।















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