पूर्णाहुति में उमड़ा आस्था का सैलाब, समापन अवसर पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
ऊखीमठ स्थित देव सेनापति भगवान कार्तिकेय की तपस्थली कुमार लोक में आयोजित
11 दिवसीय महायज्ञ एवं पुराण वाचन पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हो गया।
समापन अवसर पर दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर विश्व शांति,
मानव कल्याण और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुई पूर्णाहुति
महायज्ञ के अंतिम दिवस प्रातःकाल से ही यज्ञशाला में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम प्रारंभ हो गया।
विद्वान आचार्यों के सानिध्य में हवन कुंड में विशेष पूजा सामग्री के साथ आहुतियां दी गईं
और वैदिक विधि-विधान से पूर्णाहुति सम्पन्न कराई गई।
वैदिक ऋचाओं और धार्मिक जयघोषों से सम्पूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।
पुराण वाचन और प्रवचनों से मिला आध्यात्मिक संदेश
कार्यक्रम के दौरान आयोजित पुराण वाचन एवं धार्मिक प्रवचनों में विद्वान कथावाचकों ने
धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण पर विशेष प्रकाश डाला।
उन्होंने सनातन परंपराओं के महत्व को विस्तार से समझाते हुए समाज में धार्मिक चेतना के प्रसार का संदेश दिया।
कथा श्रवण के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भगवान कार्तिकेय की उत्सव मूर्तियों को दी गई विदाई
पूर्णाहुति के पश्चात भगवान कुमार कार्तिकेय की चल विग्रह उत्सव मूर्तियों की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
इसके बाद पारंपरिक वाद्ययंत्रों और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उत्सव मूर्तियों को उनके गद्दी स्थल सुवारी ग्वास के लिए रवाना किया गया।
श्रद्धालुओं ने जयकारों और पुष्पवर्षा के साथ भगवान को भावभीनी विदाई दी।
विश्व कल्याण और पर्यावरण संरक्षण की कामना
कार्तिकेय मंदिर समिति के अध्यक्ष बिक्रम सिंह नेगी ने बताया कि 11 दिनों तक चले
इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।
यज्ञ के माध्यम से विश्व कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्र की उन्नति और मानव मात्र की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
आयोजन की सफलता पर जताया आभार
समिति पदाधिकारियों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले संत-महात्माओं, विद्वान आचार्यों, प्रशासन,
जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवकों और क्षेत्रीय जनता का आभार व्यक्त किया।
पूरे आयोजन के दौरान कुमार लोक धार्मिक आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बना रहा।

















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