बेटियों को कांग्रेस में शामिल कराने का दबाव बनाने और धमकी देने का आरोप, ऑडियो को एडिटेड बता चुके हैं चमन सिंह
चकराता विधानसभा क्षेत्र के त्यूणी में कथित वायरल ऑडियो मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए
कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह के भाई एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चमन सिंह और पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजपाल सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
त्यूणी निवासी बालक राम की शिकायत पर दोनों के खिलाफ गाली-गलौज और आपराधिक धमकी से
संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
बेटियों को कांग्रेस में शामिल कराने के दबाव का आरोप
बालक राम त्यूणी क्षेत्र में ऊर्जा निगम के उपकेंद्र पर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं।
अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि 7 अक्टूबर को चमन सिंह और राजपाल सिंह ने उन्हें फोन किया था।
बातचीत के दौरान उनकी दोनों बेटियों को कांग्रेस में शामिल कराने का दबाव बनाया गया और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
बालक राम का आरोप है कि फोन पर उनके साथ गाली-गलौज भी की गई।
उन्होंने बातचीत की रिकॉर्डिंग अपने मोबाइल में सुरक्षित रखने की बात कही है।
शिकायत के अनुसार, बाद में आरोपियों ने कुछ अन्य लोगों के साथ बिजली उपकेंद्र पहुंचकर भी उनके साथ अभद्रता की और जान से मारने की धमकी दी।
बालक राम ने अपनी और परिवार की सुरक्षा की मांग करते हुए देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल को शिकायत दी थी। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।
सीएम ने पीड़ित की बेटी से की बात
मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बालक राम की बेटी दीक्षा से फोन पर बातचीत कर घटना की जानकारी ली थी।
मुख्यमंत्री ने परिवार को सुरक्षा और हरसंभव सहयोग का भरोसा देते हुए पुलिस अधिकारियों को निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
पीड़ित परिवार ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान और अन्य भाजपा नेताओं के साथ एसएसपी से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी।
चमन सिंह ने ऑडियो को बताया था एडिटेड
वायरल ऑडियो सामने आने के बाद चमन सिंह ने इसे एडिटेड बताते हुए राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया था।
उनका कहना था कि बातचीत के उस हिस्से को हटाया गया, जिसमें बालक राम ने कथित तौर पर
उनके परिवार और भाई के खिलाफ अपशब्द कहे थे। उन्होंने भी आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही थी।
फिलहाल वायरल ऑडियो की प्रमाणिकता और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है।
प्राथमिकी दर्ज होने से आरोप साबित नहीं होते। मामले में पुलिस जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।















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