मोदीनगर तक पहुंचा न्याय का कारवां
एलयूसीसी (LUCC) घोटाले से पीड़ित महिलाओं ने न्याय की मांग को
लेकर श्रीनगर से दिल्ली तक की लंबी यात्रा शुरू की है।
इस यात्रा में करीब 11 महिलाएं शामिल हैं, जो अपने साथियों के साथ पैदल दिल्ली पहुंचकर
देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाने का संकल्प लेकर निकली हैं।
बुधवार, 4 मार्च की शाम करीब 7 बजे तक सरस्वती देवी अपने साथियों भरत सिंह, सुमिता रावत, मीनाक्षी नेगी, रश्मि नौटियाल, शशि पंवार, रीता नेगी, संगीता खत्री, सीमा रावत और सुशीला नेगी के साथ उत्तर प्रदेश के मोदीनगर पहुंच चुकी थीं।
कठिन परिस्थितियों और लंबी दूरी के बावजूद महिलाओं का हौसला बुलंद है।
हाईवे साइनेज और गंदगी पर उठाए सवाल
यात्रा के दौरान महिलाओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे हाईवे साइनेज बोर्डों में दर्शाई गई दूरी को गलत बताया।
उनका कहना है कि कई स्थानों पर बोर्डों पर अंकित दूरी वास्तविक दूरी से मेल नहीं खाती।
इसके साथ ही उन्होंने पूरे रास्ते में फैली गंदगी पर भी नाराजगी जताई।
महिलाओं का कहना है कि ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये विज्ञापनों पर खर्च कर रही है,
लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी स्थिति बेहद कमजोर दिखाई देती है।
उनके अनुसार योजनाओं की चमक कागजों और विज्ञापनों तक सीमित रह गई है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।
न्याय की राह में स्वास्थ्य भी बना चुनौती
इस लंबी और कठिन यात्रा के दौरान चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
मंगलवार, 3 मार्च को जब महिलाएं मेरठ पहुंचीं तो यात्रा का नेतृत्व कर रहीं सरस्वती देवी की तबीयत अचानक खराब हो गई।
इसके बाद साथियों ने उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।
खराब स्वास्थ्य के बावजूद सरस्वती देवी ने अपने संकल्प को कमजोर नहीं होने दिया।
उन्होंने कहा “चाहे कुछ भी हो जाए, मैं अपनी यात्रा बीच में नहीं छोड़ूंगी। जब न्याय की राह पर निकली हूं तो न्याय लेकर ही लौटूंगी।”

दिल्ली की ओर बढ़ा कारवां
गुरुवार, 5 मार्च को महिलाएं फिर से दिल्ली की ओर रवाना हो चुकी हैं।
उनका उद्देश्य राजधानी पहुंचकर संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपनी पीड़ा और मांगों को रखना है।
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि वे तब तक संघर्ष जारी रखेंगी जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता।
















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