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गैरसैंण विधानसभा: नियमों के पालन को लेकर सदन में उठे सवाल

काजी निजामुद्दीन ने सरकार को घेरा

बजट सत्र के तीसरे दिन कार्यमंत्रणा समिति और विशेषाधिकार प्रस्ताव पर भी चर्चा

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में बजट सत्र 2026 के

तीसरे दिन बुधवार को कार्यवाही शुरू हुई।

सदन में विभिन्न विषयों पर चर्चा के दौरान नियमों के पालन और कार्यमंत्रणा समिति की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए।

कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने सदन में कहा कि विधानसभा नियमों के आधार पर संचालित होती है।

यदि नियमों का पालन नहीं किया जाता तो इससे जनप्रतिनिधियों और लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों को नुकसान होता है।

नियमों के अनुपालन पर उठाए सवाल

काजी निजामुद्दीन ने कहा कि जनता ने विधायिका के लिए जनप्रतिनिधियों को चुना है,

ताकि वे राज्य के आय-व्यय और नीतियों पर गंभीर चर्चा कर सकें।

उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार पहले बजट पर सामान्य चर्चा होती है और उसके बाद विभागवार चर्चा की जाती है।

लेकिन इस प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है।

निजामुद्दीन ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर ऐसी कौन-सी आपात स्थिति है कि सरकार नियमों को शिथिल करने की कोशिश कर रही है।

कार्यमंत्रणा समिति की भूमिका पर भी सवाल

विधायक ने कहा कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में कार्य मंत्रणा समिति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समिति अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रही है तो यह भी चिंता का विषय है।

पशुओं के जमावड़े का मुद्दा भी उठा

सदन में नियम 300 के तहत पशुओं के जमावड़े से आम लोगों को हो रही परेशानी का मुद्दा भी उठाया गया।

विधायकों ने कहा कि कई क्षेत्रों में आवारा पशुओं की समस्या बढ़ती जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

विशेषाधिकार प्रस्ताव पर चर्चा

सदन में विशेषाधिकार हनन से जुड़े प्रस्तावों का मुद्दा भी उठाया गया।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि कई विधायकों ने विशेषाधिकार प्रस्ताव दिए हैं और उन पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि पीठ द्वारा दिए गए निर्देशों और राज्यपाल के आदेशों का भी पालन होना चाहिए।

अधिकारियों के रवैये पर असंतोष

चर्चा के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि कुछ अधिकारियों के रवैये को लेकर जनप्रतिनिधि असंतुष्ट हैं।

बताया गया कि एक मामले में जल विद्युत निगम के प्रवर्तन निदेशक से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन दो बार प्रयास के बावजूद बात नहीं हो सकी।

विधायकों ने कहा कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर काम करना चाहिए।

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