प्रोफेसरों की पोलिंग ड्यूटी रद्द
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बड़ा फैसला, ECI के आदेश पर कोर्ट ने उठाए सवाल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को कड़ी फटकार लगाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सरकारी कॉलेजों के असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों को पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) के रूप में चुनाव ड्यूटी में लगाने का निर्देश दिया गया था।
⚖️ कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस कृष्णा राव ने कहा कि:
“चुनाव आयोग यह साबित करने में असफल रहा कि प्रोफेसरों को पोलिंग ड्यूटी में नियुक्त करना क्यों आवश्यक था।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग के पास नियुक्ति का अधिकार जरूर है, लेकिन उसे अपने ही नियमों और गाइडलाइंस का पालन करना होगा।
2010 की गाइडलाइन का उल्लंघन
कोर्ट ने पाया कि:
- ECI ने फरवरी 2010 के सर्कुलर का पालन नहीं किया
- इस सर्कुलर के अनुसार, ग्रुप ‘A’ स्तर के अधिकारियों (जैसे कॉलेज प्रोफेसर) को
- तभी चुनाव ड्यूटी में लगाया जा सकता है
- जब जिला निर्वाचन अधिकारी लिखित में विशेष कारण दर्ज करे
चूंकि आयोग ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका, इसलिए कोर्ट ने नियुक्ति को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया।
याचिका और सुनवाई का पूरा घटनाक्रम
- कॉलेज शिक्षकों के संगठन ने कोर्ट में रिट याचिका दायर की
- 13 अप्रैल को पहली सुनवाई में कोर्ट ने ECI से स्पष्टीकरण मांगा
- 16 अप्रैल को भी आयोग कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका
- 17 अप्रैल को अंतिम सुनवाई में कोर्ट ने फैसला सुनाया
सुनवाई के दौरान जस्टिस राव ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा:
“आप तो जजों को भी पोलिंग अधिकारी बना सकते हैं… मैं खुद जाने को तैयार हूं, यह मजाक नहीं है।”
क्या राहत दी कोर्ट ने
कोर्ट ने यह भी कहा कि:
- जिन प्रोफेसरों ने पहले ही ट्रेनिंग ले ली है, वे चाहें तो ड्यूटी कर सकते हैं
- ECI उन्हें उनके पद और स्थिति के अनुसार अन्य जिम्मेदारियां दे सकता है
















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