देहरादून में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधित बिल पर चल रही बहस के बीच निंदा प्रस्ताव की संभावित चर्चा ने
उत्तराखंड की राजनीति को फिर से गर्म कर दिया है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा
का विशेष सत्र बुला सकती है।
महिला आरक्षण बिल बना राजनीतिक केंद्र
महिला आरक्षण से जुड़े संशोधित बिल को संसद में आवश्यक बहुमत नहीं मिल पाया, जिसके बाद देशभर में इस
मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
सीएम धामी ने विपक्ष पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए विपक्ष के रवैये
की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस दिशा में बाधा बन रहा है।
विशेष सत्र बुलाने की अटकलें तेज
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव पारित कर केंद्र को अपनी स्थिति
स्पष्ट करना चाहती है। हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
विशेष सत्र की परंपरा पुरानी
महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए राज्यों द्वारा विशेष सत्र बुलाने की परंपरा पहले से रही है।
उत्तराखंड सरकार भी इसी क्रम में महिला आरक्षण पर अपनी प्रतिबद्धता दिखा सकती है।
कांग्रेस ने उठाए राज्य के ज्वलंत मुद्दे
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि विशेष सत्र बुलाया जाता है
तो उसमें गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने, अंकिता भंडारी मामले और सीबीआई जांच जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कांग्रेस का आरोप-राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे का इस्तेमाल
गणेश गोदियाल ने भाजपा पर आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के मुद्दे को केवल राजनीतिक फायदे के लिए
इस्तेमाल किया जा रहा है और भाजपा नेताओं को “कांग्रेस फोबिया” हो गया है।
भाजपा ने आरोपों को किया खारिज
भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष महिलाओं को पर्याप्त
प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में नहीं है और परिसीमन प्रक्रिया का विरोध कर रहा है।
महिला सशक्तिकरण पर भाजपा का जोर
भाजपा नेताओं का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और
महिला आरक्षण बिल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आने वाले दिनों में बढ़ेगी सियासी गतिविधि
महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में आ गया है। विशेष सत्र और निंदा
प्रस्ताव की चर्चाओं के बीच आने वाले दिनों में इस पर और सियासी गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
















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