उत्तराखंड में अवैध खनन को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। इसी बीच 20 अप्रैल को श्रीनगर गढ़वाल
में घटी घटनाओं ने इन सवालों को और गहरा कर दिया है। जिस दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक
बड़े आयोजन में शामिल होने पहुंचे, उसी दिन क्षेत्र के कई खनन पट्टों का अचानक बंद होना चर्चा का विषय बन गया।
सीएम दौरे के दौरान खनन गतिविधियां ठप
जानकारी के अनुसार, श्रीनगर गढ़वाल के आसपास टिहरी और पौड़ी जिलों के करीब डेढ़ दर्जन खनन पट्टों पर
उस दिन काम पूरी तरह बंद रहा। सवाल यह उठ रहा है कि ये खनन कार्य प्रशासनिक आदेश पर रोके गए या
फिर पट्टाधारकों द्वारा स्वेच्छा से बंद किए गए।
यह स्थिति इसलिए भी सवाल खड़े करती है क्योंकि आम दिनों में खनन गतिविधियां लगातार जारी रहने की
शिकायतें मिलती रही हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान ही खनन का बंद होना कई तरह की आशंकाओं को
जन्म दे रहा है।
बड़े आयोजन में पहुंचे थे मुख्यमंत्री
सीएम श्रीनगर में ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज सीजन-2’ कार्यक्रम के समापन और पुरस्कार वितरण समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।
यह आयोजन बद्रीनाथ और केदारनाथ के पुराने पैदल मार्गों को जोड़ने और उनकी पहचान को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
इसमें लगभग 113 किलोमीटर लंबी मैराथन दौड़ आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न आयु वर्गों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
अवैध खनन पर पहले से उठते रहे हैं सवाल
प्रदेश में लंबे समय से अवैध खनन को लेकर आरोप लगते रहे हैं।
खनन से राज्य को बड़ा राजस्व मिलता है, लेकिन इसके साथ ही अवैध गतिविधियों की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं।
ऐसे में सीएम के दौरे के दिन खनन का पूरी तरह बंद रहना इस बात की ओर इशारा करता है कि कहीं न कहीं
व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रेस वार्ता में सवालों से बचते दिखे मुख्यमंत्री
कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने केवल आयोजन से जुड़े एक सवाल का संक्षिप्त जवाब दिया।
बताया जा रहा है कि अन्य मुद्दों, खासकर खनन से जुड़े सवालों पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और कार्यक्रम
स्थल से निकल गए।
स्थानीय पत्रकारों द्वारा खनन से जुड़े सवाल पूछे जाने के बावजूद मुख्यमंत्री ने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया,
जिससे मीडिया और आमजन में चर्चा और तेज हो गई है।
जनता के बीच बढ़ती शंकाएं
खनन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर लगातार उठते सवालों और जवाबों की कमी ने जनता के बीच असमंजस की स्थिति
पैदा कर दी है। लोगों का मानना है कि यदि खनन से जुड़ी गतिविधियां पारदर्शी हैं, तो इस तरह अचानक बंद होने
और सवालों से बचने जैसी स्थितियां सामने नहीं आनी चाहिए।
अब देखना होगा कि सरकार इस पूरे मामले पर क्या स्पष्टीकरण देती है और अवैध खनन को लेकर उठ रहे
सवालों पर कब और कैसे स्थिति स्पष्ट करती है।
















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