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आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट: राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद BJP में शामिल

पंजाब चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा,

जब पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय की घोषणा कर दी।

इस घटनाक्रम ने राज्यसभा की राजनीति के साथ-साथ पंजाब की सियासत में भी हलचल तेज कर दी है।

राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया बड़ा ऐलान

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि संविधान के प्रावधानों के तहत

AAP के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने भाजपा में विलय का फैसला लिया है।

उन्होंने बताया कि सात सांसदों ने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया गया है।

राघव चड्ढा ने कहा, “हमने तय किया है कि राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सदस्य भारतीय संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए BJP में विलय करेंगे।”

इन नेताओं ने छोड़ी AAP

राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह,

राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी के नाम सामने आए हैं।

इन नेताओं के पार्टी छोड़ने से AAP की राज्यसभा में स्थिति कमजोर हुई है,

जबकि BJP और NDA की संख्या मजबूत हुई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार भाजपा की राज्यसभा में संख्या 113 तक पहुंच गई है, जबकि NDA का आंकड़ा 142 हो गया है।

संजय सिंह ने BJP पर साधा निशाना

AAP सांसद संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने आम आदमी पार्टी और पंजाब की जनता के साथ “घिनौना खेल” खेला है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता इस गद्दारी और धोखेबाजी को कभी माफ नहीं करेगी।

स्वाति मालीवाल ने लगाए गंभीर आरोप

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कहा कि उन्होंने 2006 में नौकरी छोड़कर देश सेवा का रास्ता चुना था।

RTI आंदोलन, अन्ना आंदोलन और आम आदमी पार्टी के गठन से लेकर दिल्ली महिला आयोग तक उन्होंने पूरी निष्ठा से काम किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और पार्टी नेतृत्व उन मूल्यों से भटक चुके हैं,

जिनके आधार पर पार्टी की शुरुआत हुई थी।

उन्होंने पार्टी में बढ़ते भ्रष्टाचार, महिलाओं के साथ उत्पीड़न, गुंडा तत्वों को बढ़ावा

और पंजाब के साथ धोखाधड़ी को पार्टी छोड़ने की बड़ी वजह बताया।

पंजाब चुनाव पर पड़ सकता है असर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले AAP के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

पंजाब फिलहाल AAP का सबसे मजबूत राज्य है और ऐसे में राज्यसभा सांसदों

की यह बड़ी टूट पार्टी की छवि और संगठन दोनों पर असर डाल सकती है।

दलबदल कानून पर भी शुरू हुई बहस

विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई से अधिक सांसद एक साथ दूसरे दल में विलय करते हैं,

तो दलबदल कानून के तहत उनकी सदस्यता बच सकती है।

इसी संवैधानिक प्रावधान के तहत इस पूरे घटनाक्रम को देखा जा रहा है।

https://regionalreporter.in/pantnagar-sidcul-vguard-workers-protest/
https://youtu.be/q5ArWD5NwFI?si=7ozVD-zv-G02h3Nu
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