मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद पौड़ी में बुआखाल से सर्किट हाउस तक करीब 7 किलोमीटर लंबे मोटरमार्ग के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण की तैयारी शुरू हो गई है।
परियोजना के पहले चरण में सड़क का सर्वे किया जा रहा है। इसी सर्वे के दौरान सड़क की जद में आने वाले पेड़ों की गणना भी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण की जद में हजारों पेड़ आ सकते हैं।
बड़ी संख्या में पेड़ों के प्रभावित होने की संभावना के बाद पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है।
अभी सिर्फ सर्वे का काम जारी
पौड़ी के DFO महातिम यादव ने बताया कि बुआखाल से सर्किट हाउस तक सड़क चौड़ीकरण से संबंधित प्रस्ताव वन विभाग को प्राप्त हुआ है।
लोक निर्माण विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम सर्वे कर रही है।
उन्होंने बताया कि सर्वे पूरा होने के बाद पेड़ों की संख्या समेत पूरी रिपोर्ट तैयार कर भारत सरकार को भेजी जाएगी।
केंद्र से आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद ही पेड़ों के छपान और कटान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
फिलहाल पेड़ों की कटाई शुरू नहीं हुई है।
पर्यावरणविदों ने उठाए सवाल
पर्यावरण प्रेमी शंकर बिष्ट ने सड़क चौड़ीकरण की योजना को लेकर चिंता जताई है।
उनका कहना है कि विकास के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से पहाड़ी क्षेत्र के पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि बुआखाल से कंडोलिया की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बेहद कम है
और यह मुख्य रूप से बाईपास के तौर पर इस्तेमाल होता है।
ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को प्रभावित कर सड़क चौड़ी करने की आवश्यकता और उपयोगिता का गंभीरता से आकलन होना चाहिए।
विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन जरूरी
शंकर बिष्ट ने कहा कि सड़क विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय संतुलन का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले इसके पर्यावरणीय प्रभाव और सड़क की वास्तविक उपयोगिता का विस्तृत आकलन किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि आज विकास के नाम पर काटे जाने वाले पेड़ों का असर आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है।


















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