जारी की री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन गाइडलाइन
Central Board of Secondary Education ने कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए री-चेकिंग
और री-इवैल्यूएशन की तारीखें और गाइडलाइन जारी कर दी हैं।
बोर्ड ने माना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के तहत कॉपियां जांचने में गलती की संभावना हो सकती है।
बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक Sanyam Bhardwaj ने कहा कि यदि मूल्यांकन में कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसे सुधारा जाएगा।
री-चेकिंग की पूरी प्रक्रिया
CBSE ने इस प्रक्रिया को दो चरणों में बांटा है।
पहला चरण: आंसर शीट की कॉपी डाउनलोड
छात्र सबसे पहले अपनी जांची हुई उत्तर पुस्तिका की डिजिटल कॉपी डाउनलोड करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- आवेदन तिथि: 19 मई से 22 मई
- फीस: 700 रुपये प्रति विषय
कॉपी मिलने के बाद छात्र अपने उत्तरों की तुलना मार्किंग स्कीम से कर सकेंगे और संभावित गलतियों की पहचान कर पाएंगे।
दूसरा चरण: वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन
1. वेरिफिकेशन
अगर छात्रों को लगता है कि अंकों की गणना में गलती हुई है या कोई उत्तर बिना जांचे रह गया है,
तो वे वेरिफिकेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- आवेदन तिथि: 26 मई से 29 मई
- फीस: 500 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका
2. री-इवैल्यूएशन
यदि किसी प्रश्न में सही उत्तर होने के बावजूद कम अंक दिए गए हैं, तो छात्र उस विशेष प्रश्न के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- फीस: 100 रुपये प्रति प्रश्न
बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं अंक
CBSE ने साफ किया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद छात्रों के अंक बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं।
परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज के मुताबिक, अगर विशेषज्ञों की जांच में गलती साबित होती है तो अंक संशोधित किए जाएंगे।
हालांकि, यदि सुधार के बाद अंक कम होते हैं तो नया स्कोर ही अंतिम माना जाएगा।
क्या है OSM सिस्टम?
ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसे CBSE ने पहली बार 2026 की 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में लागू किया है।
इस प्रक्रिया में छात्रों की कॉपियों को स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में बदला जाता है,
और शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करते हैं।
कुल अंक सॉफ्टवेयर के जरिए स्वतः जोड़े जाते हैं।
क्यों उठा विवाद OSM सिस्टम पर
12वीं के रिजल्ट आने के बाद सोशल मीडिया पर OSM सिस्टम को लेकर छात्रों ने सवाल उठाए।
इस साल CBSE का पास प्रतिशत घटकर 85.2% रहा, जो पिछले सात वर्षों में सबसे कम बताया जा रहा है।
कई छात्रों का दावा है कि उन्होंने Indian Institutes of Technology
और National Institutes of Technology में प्रवेश के लिए JEE Main जैसी कठिन परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया,
लेकिन बोर्ड परीक्षा में उम्मीद से कम अंक आने के कारण वे 75% पात्रता मानदंड पूरा नहीं कर सके।
फीस को लेकर भी उठे सवाल
री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया की फीस को लेकर भी छात्रों और अभिभावकों ने सवाल उठाए हैं।
अगर कोई छात्र कई विषयों में पुनर्मूल्यांकन कराना चाहता है तो कुल खर्च 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच सकता है,
जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए भारी बोझ माना जा रहा है।
RTI में सामने आई करोड़ों की कमाई
रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE ने पिछले वर्ष री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया से करीब 23 करोड़ रुपये की आय प्राप्त की।
RTI के जरिए सामने आया कि उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी और पुनर्मूल्यांकन फीस से बोर्ड को करोड़ों रुपये मिले।
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