महिलाओं को मिल रहा रोजगार, आत्मनिर्भर उत्तराखंड विजन को पौड़ी से नई दिशा
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के “आत्मनिर्भर उत्तराखंड” विजन को जनपद Pauri में नई मजबूती मिल रही है।
ग्राम्य विकास विभाग की ग्रामोत्थान परियोजना के तहत विकासखंड पौड़ी में “हिलांस मशरूम इकाई”
में बेमौसमी बटन मशरूम का सफल उत्पादन शुरू हो गया है।

गर्मियों में भी तैयार हो रहा लोकल बटन मशरूम
संकेत स्वायत्त सहकारिता द्वारा संचालित इस यूनिट में पौड़ी की अनुकूल जलवायु का उपयोग कर गर्मियों में भी बटन मशरूम उगाया जा रहा है।
सामान्यतः मैदानी क्षेत्रों में इस मौसम में बटन मशरूम उत्पादन कठिन माना जाता है,
लेकिन पहाड़ी मौसम ने इसे संभव बना दिया है।
आधुनिक यूनिट में शुरू हुआ उत्पादन
ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत ग्राम्य विकास विभाग के अनुपयोगी भवन को आधुनिक मशरूम उत्पादन इकाई में बदला गया है।
यहां दो उत्पादन यूनिट स्थापित की गई हैं।
पहली यूनिट में 500 मशरूम बैग लगाए गए थे, जिनसे अब नियमित उत्पादन शुरू हो चुका है।

होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसायियों से बढ़ी मांग
स्थानीय स्तर पर तैयार ताजा और केमिकल-फ्री मशरूम की मांग तेजी से बढ़ रही है।
होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग व्यवसायी और शादी समारोह आयोजक बड़ी मात्रा में मशरूम खरीद रहे हैं।
सुबह हार्वेस्ट किए गए मशरूम उसी दिन बाजार और उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जा रहे हैं।
महिलाओं को मिल रहा रोजगार और स्वरोजगार
इस परियोजना से स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।
महिलाएं मशरूम बैग तैयार करने, स्पॉनिंग, तापमान और नमी प्रबंधन, हार्वेस्टिंग, ग्रेडिंग और पैकेजिंग जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
इससे महिला उद्यमिता और ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिल रही है।
अब तक 245 किलो मशरूम की बिक्री
ग्रामोत्थान परियोजना प्रबंधक Kuldeep Bisht ने बताया कि 5 मई से अब तक लगभग 245 किलोग्राम बटन मशरूम का विक्रय किया जा चुका है।
अगले 70 से 75 दिनों में 1100 से 1200 किलोग्राम उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
शिटाके मशरूम उत्पादन की भी तैयारी
परियोजना के तहत शीतकाल में उच्च गुणवत्ता वाले शिटाके मशरूम उत्पादन की भी योजना बनाई गई है।
साथ ही दूसरी यूनिट में 25 मई से करीब 700 अतिरिक्त मशरूम बैग लगाए जाएंगे, जिससे पूरे वर्ष उत्पादन और बाजार आपूर्ति जारी रखी जा सकेगी।
दूसरे क्षेत्रों में भी लागू होगा मॉडल
ग्रामोत्थान परियोजना के तहत शुरू की गई यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और
स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभर रही है।
भविष्य में इसे जनपद के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार देने की योजना है।
















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