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देवप्रयाग में चुनावी सरगर्मी तेज: ‘फील्ड मार्शल’ के बिना होगा पहला चुनाव, दो बार और तीन बार के विधायकों के बीच मुकाबले की चर्चा

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है।

राजेश भट्ट ‘ टक्कल’

सोशल मीडिया से लेकर गांवों की चौपालों तक चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस बार का चुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है,

क्योंकि क्षेत्र पहली बार उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता और ‘फील्ड मार्शल’ दिवाकर भट्ट की गैरमौजूदगी में चुनावी मुकाबला देखेगा।

भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबले के संकेत

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच रह सकता है।

एक ओर भाजपा लगातार दो बार विधायक रहे अपने मौजूदा चेहरे के विकास कार्यों और संगठनात्मक मजबूती के दम पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है,

वहीं कांग्रेस तीन बार विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे वरिष्ठ नेता के अनुभव और पुराने जनाधार के सहारे वापसी की उम्मीद लगाए हुए है।

दिवाकर भट्ट की गैरमौजूदगी से बदले समीकरण

देवप्रयाग की राजनीति में दिवाकर भट्ट का विशेष प्रभाव रहा है।

क्षेत्र में उनका व्यक्तिगत जनाधार और आंदोलनकारी छवि लंबे समय तक चुनावी परिणामों को प्रभावित करती रही।

पिछले चुनाव में मिले करीब 30 प्रतिशत वोटों ने उनके प्रभाव को साबित किया था।

ऐसे में उनके निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनका समर्थक वर्ग आगामी चुनाव में किस दल या प्रत्याशी का समर्थन करेगा।

उक्रांद के सामने नई चुनौती

दिवाकर भट्ट के बाद उत्तराखंड क्रांति दल नए नेतृत्व की तलाश में जुटा है।

पार्टी के भीतर कई स्थानीय कार्यकर्ताओं के नाम चर्चा में हैं, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है

कि दिवाकर भट्ट जैसा जनस्वीकार्य चेहरा तैयार करना आसान नहीं होगा। ऐसे में उक्रांद के पारंपरिक वोट बैंक में बिखराव की संभावना भी जताई जा रही है।

सोशल मीडिया पर समर्थक आमने-सामने

चुनावी माहौल के बीच भाजपा और कांग्रेस समर्थक सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं।

भाजपा समर्थक सरकार की उपलब्धियों, सड़क, शिक्षा और विकास योजनाओं को प्रमुखता से उठा रहे हैं।

वहीं कांग्रेस समर्थक बेरोजगारी, पलायन और क्षेत्रीय समस्याओं को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं।

मौन मतदाता पर टिकी निगाहें

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर चाहे जितनी बहस हो रही हो,

लेकिन चुनाव का असली फैसला क्षेत्र का मौन मतदाता ही करेगा। विशेष रूप से वे मतदाता,

जो दिवाकर भट्ट की साफ-सुथरी राजनीति और जनसंघर्षों से प्रभावित रहे हैं, इस बार चुनावी परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

टिकट वितरण के बाद साफ होगी तस्वीर

फिलहाल सभी दलों के संभावित दावेदार अपनी-अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं।

हालांकि चुनावी तस्वीर टिकट वितरण और उक्रांद की रणनीति सामने आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि देवप्रयाग का चुनावी ऊंट आखिर किस करवट बैठता है।

https://regionalreporter.in/srinagar-trade-association-elections/
https://youtu.be/P4dYKabSTrA?si=idFh-QEwzwsQhBbj

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