श्यामपुर रेंज के रेंजर और फॉरेस्ट गार्ड निलंबित
दो बाघों की मौत से मचा हड़कंप, HoFF ने जारी किया निलंबन आदेश
उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज में दो बाघों के शिकार मामले में
वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रेंज अधिकारी विनय कुमार राठी और एक फॉरेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया है।
प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) उत्तराखंड की ओर से जारी आदेश में प्रथम दृष्टया लापरवाही
पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया। इस कार्रवाई के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है।
शिकार मामले में निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
25 मई 2026 को जारी आदेश के अनुसार मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल की संस्तुति के बाद
वन क्षेत्राधिकारी विनय कुमार राठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
निलंबन अवधि में उन्हें हरिद्वार वन प्रभाग कार्यालय से संबद्ध रखा जाएगा।
बताया जा रहा है कि बीते कुछ महीनों में हरिद्वार वन प्रभाग लगातार वन्यजीव अपराधों
और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही को लेकर चर्चा में रहा है।
ऐसे में दो बाघों के शिकार ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
कुछ दिन पहले हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज के सजनपुर बीट में दो बाघों के शव मिलने से सनसनी फैल गई थी।
शुरुआती जांच में सामने आया कि शिकारियों ने बाघों को जहर देकर मारा था।
वन विभाग ने इस मामले में पहले एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जबकि बाद में तीन अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी हुई।
हालांकि अभी तक बाघों के पंजे बरामद नहीं हो पाए हैं, जिससे यह मामला और गंभीर माना जा रहा है।
जांच में गश्त और सुरक्षा व्यवस्था की खुल सकती हैं पोल
सूत्रों के मुताबिक विभागीय जांच में क्षेत्रीय निगरानी और गश्त व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आ सकती हैं।
प्रथम दृष्टया लापरवाही मिलने के बाद रेंज स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए रेंजर और फॉरेस्ट गार्ड पर कार्रवाई की गई है।
वन विभाग अब विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर रहा है और संभावना जताई जा रही है कि आगे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
NTCA की टीम उत्तराखंड पहुंच सकती है
दो बाघों की मौत का मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया है।
जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपनी टीम उत्तराखंड भेज सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों को जहर देकर मारना और उनके पंजे काटकर ले जाना संगठित वन्यजीव अपराध की ओर इशारा करता है।
पहले भी विवादों में रहा हरिद्वार वन प्रभाग
हरिद्वार वन प्रभाग पिछले कई महीनों से लगातार विवादों में रहा है।
इससे पहले सांपों के जहर की तस्करी और हाथियों की मौत के मामलों ने भी वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार बीते आठ महीनों में चार से अधिक हाथियों की मौत हो चुकी है।
अब दो बाघों के शिकार ने वन्यजीव संरक्षण तंत्र की कमजोरियों को फिर उजागर कर दिया है।
राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे इलाके में बढ़ी चिंता
हरिद्वार वन प्रभाग बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है क्योंकि यह राजाजी टाइगर रिजर्व और वन्यजीव कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है।
यहां मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निगरानी तंत्र मजबूत नहीं किया गया
तो शिकारी आसानी से सक्रिय रहेंगे और वन्यजीवों के लिए खतरा बढ़ता जाएगा।
महाकुंभ से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
हरिद्वार में आने वाले समय में महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन की तैयारियां शुरू होनी हैं।
ऐसे में वन क्षेत्रों में बढ़ती वन्यजीव अपराध की घटनाएं प्रशासन और वन विभाग दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
महाकुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच वन क्षेत्रों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
इसलिए वन्यजीव सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।
विभागीय जांच के बाद हो सकती है बड़ी कार्रवाई
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई शुरुआती स्तर की है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है तो आगे और भी सख्त कार्रवाई हो सकती है।
दो बाघों के शिकार की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या उत्तराखंड में
वन्यजीव संरक्षण केवल कागजों तक सीमित है या जमीन पर भी प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
















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