ई-संजीवनी के 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन
मिलेट्स की खेती से लेकर ब्रेन रिसर्च तक की चर्चा, भाई परमानंद और नरिंदर सिंह कपानी को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 25 अक्टूबर को ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में उत्तराखंड की हेंवल नदी के
पुनर्जीवन से लेकर डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान और पारंपरिक खेती तक कई विषयों पर बात की।
उन्होंने त्योहारों पर स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने, अंगदान को प्रोत्साहित करने और देश की महान विभूतियों से प्रेरणा लेने की अपील की।
उत्तराखंड की हेंवल नदी का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हेंवल नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने बताया कि नदी का जलस्तर घटने और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने के बाद स्थानीय प्रशासन तथा ग्रामीणों ने मिलकर अभियान चलाया।
इसमें वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और पौधरोपण जैसे उपाय किए गए।
PM मोदी के मुताबिक, इन प्रयासों से हेंवल नदी को फिर से जीवंत करने के साथ दर्जनों प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन में भी मदद मिली।
ई-संजीवनी से 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन
मोदी ने बताया कि ई-संजीवनी के माध्यम से अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यह सेवा दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से जोड़ रही है।
देश में करीब 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के करीब पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने आईआईटी मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का जिक्र करते हुए बताया कि यहां 100 मानव
मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3डी मैपिंग और अध्ययन का लक्ष्य है।
इस शोध में परम शक्ति सुपरकंप्यूटर का उपयोग किया जा रहा है।
मिलेट्स की खेती को फिर बढ़ावा, किसानों की आय पर जोर
प्रधानमंत्री ने मेघालय और नगालैंड में मोटे अनाज यानी मिलेट्स की खेती दोबारा बढ़ने के उदाहरण साझा किए।
मेघालय के खांडुली गांव में दो महिलाओं ने मिलेट्स से कुकीज, केक, मफिन और बेबी फूड बनाना शुरू किया। इससे उत्पादों की मांग बढ़ी और किसानों ने दोबारा इसकी खेती शुरू की।
नगालैंड के केजोमा गांव में भी 2024 में मिलेट्स की खेती दोबारा शुरू हुई और 2025 में पहला मिलेट्स महोत्सव आयोजित किया गया।
PM मोदी ने कहा कि पारंपरिक फसलों को नए उत्पादों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
भाई परमानंद और नरिंदर सिंह कपानी को किया याद
प्रधानमंत्री ने 4 नवंबर को भाई परमानंद की 150वीं जयंती का जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि भाई परमानंद स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे और गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे।
अंग्रेजों ने उन्हें कालापानी की सजा दी थी।
मोदी ने युवाओं से उनकी आत्मकथा आपबीती: काले पानी की कारावास कहानी पढ़ने की अपील की।
उन्होंने बताया कि भाई परमानंद ने भगत सिंह को भी पढ़ाया था।
मोदी ने 31 अक्टूबर को फाइबर ऑप्टिक्स के जनक कहे जाने वाले वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी की 100वीं जयंती का भी उल्लेख किया।
साथ ही, सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित होने वाली ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेने का आह्वान किया।
वोकल फॉर लोकल और अंगदान का संदेश
त्योहारों की खरीदारी में मोदी ने स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की।
उन्होंने बताया कि गांधी जयंती पर खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की बिक्री एक दिन में 28 करोड़ रुपये से अधिक रही।
उन्होंने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी के अंगदान का उदाहरण देते हुए कहा कि अंगदान जरूरतमंदों का जीवन बचाने के साथ चिकित्सा अनुसंधान में भी योगदान दे सकता है।
प्रधानमंत्री ने 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती का उल्लेख करते हुए सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता की सीख को जीवन में अपनाने की अपील की।
उन्होंने दिवाली और छठ सहित आगामी त्योहारों को सुरक्षित तरीके से मनाने तथा अपनी खुशियों में दूसरों को शामिल करने का संदेश भी दिया।
















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