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सरोकारों से साक्षात्कार

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों पर फायरिंग

भारत ने ईरान के राजदूत को तलब कर जताई कड़ी आपत्ति

मर्चेंट शिपिंग सुरक्षा पर भारत का सख्त संदेश, कूटनीतिक स्तर पर बढ़ी हलचल

मध्य पूर्व के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो भारतीय जहाजों पर कथित गोलीबारी की घटना के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है।

भारत सरकार ने ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहअली को तलब कर इस मामले में औपचारिक विरोध दर्ज कराया।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने राजदूत के साथ हुई बैठक में इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि भारत

अपने व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

क्या है पूरा मामला

मीडिया रिपोर्ट्स और समुद्री निगरानी एजेंसियों के अनुसार, 18 अप्रैल को:

  • ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजर रहे दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर गोलीबारी की गई
  • इनमें एक सुपरटैंकर भी शामिल था, जो लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा था
  • कथित तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना की ओर से फायरिंग हुई
  • जहाजों को बीच रास्ते से ही वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा

समुद्री ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मॉनिटरिंग स्रोतों ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि कई जहाजों को अपना रूट बदलना पड़ा।

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि:

  • भारत ने इस घटना को गंभीरता से लिया है
  • ईरान से आग्रह किया गया है कि वह भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करे
  • ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ मार्ग को जल्द से जल्द सुरक्षित और सामान्य बनाया जाए

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने यह भी याद दिलाया कि अतीत में ईरान ने भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने में सहयोग किया है।

ईरान की प्रतिक्रिया

भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“भारत और ईरान के रिश्ते हजारों साल पुराने हैं और बहुत मजबूत हैं। हमें उम्मीद है कि इस मामले का समाधान निकलेगा।”

हालांकि उन्होंने इस विशेष घटना की प्रत्यक्ष जानकारी होने से इनकार किया।

वैश्विक व्यापार पर असर की आशंका

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ दुनिया के सबसे व्यस्त तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार का तनाव:

  • वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित कर सकता है
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग लागत बढ़ा सकता है
  • क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर सकता है

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।

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