उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों और वन विभाग में वर्षों से कार्यरत दैनिक श्रमिकों के
नियमितीकरण से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने इस मामले में
अगली सुनवाई के लिए 8 मई 2026 की तिथि तय की है।
नियमितीकरण पर फैसले के लिए अधिकारियों को निर्देश
सुनवाई के दौरान सचिव कार्मिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।
कोर्ट ने पूर्व आदेशों का अवलोकन करते हुए निर्देश दिया कि सचिव कार्मिक, सचिव वित्त और मुख्य सचिव आपस
में बैठक कर यह तय करें कि वर्तमान नियमावली के तहत कर्मचारियों को किस प्रकार नियमित किया जा सकता है।
न्यूनतम वेतनमान पर भी विचार करने को कहा
हाईकोर्ट ने सरकार को यह भी सुझाव दिया कि उपनल संविदा कर्मचारियों और वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को
न्यूनतम वेतनमान देने के विषय में गंभीरता से विचार किया जाए। इस संबंध में सचिव कार्मिक को 8 मई तक
जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
अवमानना याचिकाओं पर जताई नाराजगी
न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने पूर्व आदेशों का पालन न होने पर नाराजगी जताई। कर्मचारी संघ
की ओर से दायर अवमानना याचिकाओं में कहा गया है कि कोर्ट के पहले के आदेशों के बावजूद सरकार ने अब
तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
सरकार की दलील: नियमितीकरण का प्रावधान नहीं
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए फिलहाल कोई स्पष्ट
प्रावधान नहीं है। हालांकि, न्यूनतम वेतनमान देने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
कर्मचारियों का पक्ष
उपनल संविदा कर्मचारी संघ के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि खंडपीठ के आदेश के बावजूद सरकार ने
नियमितीकरण पर कोई निर्णय नहीं लिया और न ही इसे न्यायालय के रिकॉर्ड में प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग भी की।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
- समान काम के लिए समान वेतन
- स्थायी नियुक्ति (नियमितीकरण)
- वेतन से जीएसटी कटौती पर रोक
अब इस मामले में सभी की नजर 8 मई की अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां सरकार को अपना स्पष्ट रुख कोर्ट के सामने रखना होगा।
















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