भारती जोशी
दून पुस्तकालय में हुआ भव्य आयोजन
देहरादून, 19 मई 2026। उत्तराखंड में पत्रकारिता के पुरोधा और ‘कर्मभूमि’ के संपादक स्वर्गीय भैरव दत्त धूलिया के जन्मदिवस के अवसर पर आज दून पुस्तकालय में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘कर्मभूमि फाउंडेशन’ की ओर से आयोजित इस विशेष गरिमामयी समारोह में प्रख्यात वैकल्पिक मीडिया संस्थान ‘बारामासा’ के सीईओ और वरिष्ठ पत्रकार राहुल कोटियाल को चौथे ‘भैरव दत्त धूलिया सम्मान’ से नवाजा गया। पुरस्कार के रूप में उन्हें सम्मान पत्र, शॉल और एक लाख रुपये की सम्मान राशि भेंट की गई।

संसाधनों के अभाव में भी सिद्धांतों से समझौता नहीं: राहुल कोटियाल
सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में राहुल कोटियाल ने बेहद भावुक और विचारोत्तेजक बातें साझा कीं। उन्होंने अपने व्याख्यान की शुरुआत उन सभी साथियों, लेखकों और आर्थिक सहयोगियों का आभार जताकर की, जिन्होंने ‘बारामासा’ की शुरुआत से लेकर अब तक हर मोड़ पर उनका साथ दिया है।
राहुल कोटियाल ने इस बात को पुरजोर तरीके से रेखांकित किया कि ‘बारामासा’ जैसे वैकल्पिक मीडिया संस्थान आज भी गंभीर आर्थिक अभावों और बेहद सीमित संसाधनों के बीच काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा:
”भले ही आज संस्थान को चलाने के लिए भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन हमारी टीम और हमारे परिवार का नैतिक और सैद्धांतिक मनोबल इतना ऊंचा है कि हम किसी भी कीमत पर अपने उसूलों से समझौता नहीं करेंगे। अगर कभी ऐसी नौबत आई कि पत्रकारिता के मूल्यों को बेचना पड़े, तो हम उसूलों से समझौता करने के बजाय संस्थान को ही बंद करना बेहतर समझेंगे।”

निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए समाज को भी आगे आना होगा
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति, निष्पक्ष पत्रकारों की भूमिका और सामाजिक सरोकारों पर एक बेहद शानदार और गंभीर चर्चा हुई। राहुल कोटियाल ने समाज और दर्शकों से भी एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब स्वतंत्र पत्रकारिता करना सबसे कठिन काम हो चुका है, तब समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
उन्होंने कहा कि लोगों में यह धारणा बन चुकी है कि अगर कोई कंटेंट यूट्यूब (YouTube) या अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर उपलब्ध है, तो उसे मुफ्त (Free) में ही देखा जाना चाहिए। समाज को इस सोच से बाहर निकलना होगा। जो लोग दिन-रात मेहनत करके निष्पक्ष और खोजी पत्रकारिता का कंटेंट तैयार कर रहे हैं, उस पूरी प्रक्रिया में भारी खर्च और कई तरह के जोखिम आते हैं। इसलिए, यदि लोग चाहते हैं कि देश और राज्य में निष्पक्ष पत्रकारिता जिंदा रहे, तो दर्शकों और समाज को आगे आकर ऐसे स्वतंत्र संस्थानों का आर्थिक और नैतिक रूप से सहयोग करना ही होगा।

वरिष्ठ पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की रही गरिमामयी मौजूदगी
कार्यक्रम में उत्तराखंड के पत्रकारिता जगत से जुड़े दिग्गज, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने स्वर्गीय भैरव दत्त धूलिया के योगदान को याद करते हुए वर्तमान दौर में राहुल कोटियाल और उनकी टीम द्वारा की जा रही निर्भीक पत्रकारिता की जमकर सराहना की और इसे उत्तराखंड के पर्वतीय सरोकारों की असली आवाज बताया।


















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