भारती जोशी
सट्टेबाजी वाले ऐप्स पर कसेगा शिकंजा
रियल मनी गेम्स पर सख्ती, बच्चों की सुरक्षा और कड़े दंड का नया ढांचा लागू
भारत में ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया 1 मई 2026 से बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश करने जा रही है।
केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ऑनलाइन गेमिंग के प्रचार और विनियमन नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है।
नए नियमों के तहत सट्टेबाजी और रियल मनी गेम्स पर कड़ी रोक लगाई जाएगी,
जबकि बच्चों की सुरक्षा और जिम्मेदार गेमिंग को प्राथमिकता दी जाएगी।
दिल्ली में बनेगी ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी
सरकार ‘ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (OGAI) का गठन कर रही है,
जो इस पूरे क्षेत्र की केंद्रीय नियामक संस्था होगी।
इसमें गृह, वित्त, खेल और कानून मंत्रालय सहित कई विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।
यह अथॉरिटी तय करेगी कि कौन सा गेम ‘स्किल गेम’ है और कौन सा ‘ऑनलाइन मनी गेम’ या सट्टेबाजी की श्रेणी में आता है।
नियमों के अनुसार, ई-स्पोर्ट्स और जोखिम वाले मामलों में पंजीकरण और निर्धारण की प्रक्रिया लागू होगी।

रियल मनी गेम्स पर सख्त कार्रवाई
ऐसे गेम जिनमें पैसा लगाकर अधिक पैसा जीतने का लालच दिया जाता है, उन पर कड़ी निगरानी और प्रतिबंध लागू होगा।
बैंकिंग सेवा प्रदाताओं और UPI प्लेटफॉर्म्स को भी यह सत्यापित करना होगा कि संबंधित गेम भारत में अनुमत है या नहीं।
यदि कोई गेम अथॉरिटी द्वारा प्रतिबंधित घोषित किया जाता है, तो उसके वित्तीय लेनदेन रोके जा सकते हैं।
सट्टेबाजी वाले गेम्स के विज्ञापनों पर भी रोक लगाई जाएगी।

बच्चों की सुरक्षा के लिए नए सुरक्षा फीचर्स
नए नियमों में बच्चों और युवाओं की सुरक्षा के लिए ‘यूजर सेफ्टी फीचर्स’ अनिवार्य किए गए हैं।
इनमें एज वेरिफिकेशन, एज-गेटिंग, टाइम लिमिट, पैरेंटल कंट्रोल, यूजर रिपोर्टिंग टूल्स और काउंसलिंग सपोर्ट जैसे फीचर्स शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि लंबे समय तक गेमिंग से बच्चों में शारीरिक और मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं, इसलिए यह कदम जरूरी है।

नियम तोड़ा तो जेल और भारी जुर्माना
नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान किया गया है।
पहली बार उल्लंघन पर 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
दोबारा पकड़े जाने पर सजा 5 साल तक और जुर्माना 2 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है।
जांच एजेंसियों को डिजिटल डिवाइस जब्त करने और कार्रवाई के अधिकार भी दिए गए हैं।
शिकायत के लिए डिजिटल पोर्टल
यदि 1 मई के बाद कोई गेमिंग ऐप धोखाधड़ी करता है या नियमों का पालन नहीं करता,
तो उपभोक्ता ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी के डिजिटल पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
कंपनी को 30 दिनों के भीतर जवाब देना होगा और 90 दिनों के भीतर अथॉरिटी अंतिम फैसला सुना सकती है।
कानूनी विश्लेषण: डिजिटल सबूत बनेंगे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, नया कानून जितना सख्त दिख रहा है,
अदालतों में इसकी सफलता डिजिटल साक्ष्यों की मजबूती पर निर्भर करेगी।
भारतीय साक्ष्य संहिता (BSA), 2023 के तहत किसी भी डिजिटल सबूत को प्रमाणित करने के लिए उचित प्रक्रिया और प्रमाणपत्र आवश्यक होंगे।
यदि जांच एजेंसियां डेटा जब्ती में तकनीकी चूक करती हैं, तो आरोपी को इसका लाभ मिल सकता है।
साथ ही, निजता के अधिकार, पासवर्ड एक्सेस, विदेशी सर्वर और अंतरराष्ट्रीय डेटा एक्सेस जैसे मुद्दे भी अदालतों में चुनौती बन सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे आधिकारिक कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
















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