अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगामी 7 और 8 जुलाई को तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित होने वाले नाटो
(NATO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कांग्रेस के समक्ष इसकी पुष्टि की है।
ट्रंप की भागीदारी को लेकर पिछले कई हफ्तों से चल रही अटकलों पर इस घोषणा के साथ विराम लग गया है।
32 सदस्य देशों के नेता होंगे शामिल
अंकारा स्थित राष्ट्रपति परिसर में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में नाटो के सभी 32 सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख शामिल होंगे।
सम्मेलन में रक्षा खर्च बढ़ाने, यूक्रेन को सैन्य सहायता, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
NATO को लेकर ट्रंप की रही है आलोचनात्मक राय
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई बार नाटो सदस्य देशों की रक्षा खर्च को लेकर आलोचना कर चुके हैं।
उनका कहना रहा है कि कई यूरोपीय देश सामूहिक सुरक्षा के लिए पर्याप्त वित्तीय योगदान नहीं दे रहे हैं।
इसके अलावा ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों पर सहयोगी देशों के रुख को लेकर भी उन्होंने असंतोष जताया था।
अमेरिका NATO में बना रहेगा: रुबियो
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका नाटो का हिस्सा बना रहेगा और यह सम्मेलन सहयोगी देशों के बीच
रणनीतिक मतभेदों पर चर्चा का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच गठबंधन की एकजुटता बनाए रखना जरूरी है।
यूक्रेन और रक्षा क्षमता पर रहेगा फोकस
नाटो महासचिव मार्क रुटे ने कहा कि बैठक में सदस्य देशों द्वारा रक्षा बजट बढ़ाने और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के
लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की को भी सम्मेलन की कुछ गतिविधियों में
भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
NATO के भविष्य के लिए अहम माना जा रहा सम्मेलन
यह नाटो का 36वां शिखर सम्मेलन होगा और तुर्की दूसरी बार इसकी मेजबानी करेगा।
इससे पहले 2004 में इस्तांबुल में नाटो शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह बैठक अमेरिका और नाटो के भविष्य के संबंधों की दिशा तय
करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


















Leave a Reply