न्यायपालिका पर विवादित सामग्री हटाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जारी हुआ संशोधित संस्करण, PIL और ट्रिब्यूनल जैसे नए विषय जोड़े गए
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद
कक्षा 8 की सोशल साइंस की संशोधित (एडिटेड) पाठ्यपुस्तक जारी कर दी है।
नई किताब में न्यायपालिका से जुड़े कई विवादित हिस्सों को हटाकर उनकी जगह नए विषय शामिल किए गए हैं।
क्या-क्या हटाया गया किताब से
संशोधित पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’, ‘ज्यूडिशियल बैकलॉग (लंबित मामले)’ और सुप्रीम कोर्ट के कुछ चर्चित फैसलों से जुड़े सेक्शन हटा दिए गए हैं।
इसके अलावा न्यायपालिका में जजों की कमी, लंबित मामलों और न्यायिक व्यवस्था की चुनौतियों पर आधारित सामग्री भी नए संस्करण में शामिल नहीं की गई है।
इन नए विषयों को मिली जगह
नई किताब में छात्रों को न्यायिक व्यवस्था की मूल संरचना समझाने के लिए निम्नलिखित विषय जोड़े गए हैं-
- सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
- जनहित याचिका (PIL)
- ट्रिब्यूनल
- वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution)
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के उदाहरण भी हटे
पहले के संस्करण में श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ मामले और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) बनाम भारत संघ मामले का उल्लेख किया गया था। संशोधित पुस्तक में इन दोनों मामलों के संदर्भ भी हटा दिए गए हैं।
‘स्वतंत्र न्यायपालिका’ वाला हिस्सा भी बदला
पुरानी किताब में स्वतंत्र न्यायपालिका को मौलिक अधिकारों की सुरक्षा का आधार बताया गया था।
संशोधित संस्करण में इस हिस्से को भी हटाकर अध्याय की शुरुआत में पूछे जाने वाले प्रश्न को बदला गया है।
अब छात्रों से पूछा गया है कि “न्याय एक न्यायपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाज के लिए क्यों आवश्यक है?”
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हुआ संशोधन
इस वर्ष फरवरी में जारी कक्षा 8 की सोशल साइंस (भाग-2) की पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े कुछ अंशों पर विवाद खड़ा हो गया था।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान NCERT ने स्वीकार किया कि पुस्तक में कुछ अनुचित सामग्री शामिल हो गई थी और अदालत से खेद भी व्यक्त किया था।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पुस्तक के प्रिंट और डिजिटल संस्करणों के वितरण पर रोक लगाते हुए संबंधित अध्याय को दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया था।
अब उसी निर्देश के अनुपालन में संशोधित पुस्तक जारी की गई है।

















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