भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के एक भ्रष्टाचार मामले में आरोपी से जब्त किए गए नोटों को चूहों द्वारा
कुतरकर नष्ट किए जाने के दावे पर गहरी हैरानी जताई है।
न्यायमूर्ति J.B. Pardiwala और न्यायमूर्ति K.V. Viswanathan की पीठ ने इस मामले की
सुनवाई करते हुए इसे राज्य के लिए “राजस्व का भारी नुकसान” बताया।
महिला अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप
यह मामला एक महिला द्वारा दायर याचिका के दौरान सामने आया।
याचिकाकर्ता वर्ष 2014 में बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी (CDPO) के पद पर कार्यरत थी।
उस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत मुकदमा चलाया गया था।
महिला पर 10,000 रुपये की रिश्वत मांगने और स्वीकार करने का आरोप था।
इस मामले में उसे दोषी ठहराते हुए चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।
मालखाना की खराब स्थिति का दिया गया हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के पिछले वर्ष फरवरी के फैसले का उल्लेख किया,
जिसमें कहा गया था कि ‘मालखाना’ की खराब स्थिति के कारण जब्त किए गए नोटों को चूहों और अन्य कुतरने वाले जीवों ने नष्ट कर दिया।
पीठ ने इस स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लगता।
कोर्ट ने कहा- यह गंभीर राजस्व नुकसान
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 24 अप्रैल के आदेश में कहा कि यह जानकर आश्चर्य होता है कि ऐसे मामलों में बरामद
कितने नोट इसी तरह नष्ट हो जाते होंगे क्योंकि उन्हें सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा जाता।
पीठ ने कहा कि यह राज्य के लिए राजस्व का बहुत बड़ा नुकसान है।
साथ ही नोटों के नष्ट होने के लिए दी गई दलील भी भरोसे के लायक नहीं लगती।
हाईकोर्ट ने पलटा था ट्रायल कोर्ट का फैसला
ट्रायल कोर्ट ने महिला को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन विभाग ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए याचिकाकर्ता को दोषी करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत
सुप्रीम Court ने पहले महिला को अगले आदेश तक आत्मसमर्पण से छूट दी थी।
अब अदालत ने हाईकोर्ट द्वारा दी गई सजा को निलंबित करते हुए उसे जमानत दे दी है।
अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता को ट्रायल कोर्ट द्वारा तय नियमों और शर्तों के आधार पर जमानत पर रिहा किया जाएगा।
















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