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जोजिला सुरंग परियोजना ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, आज होगा अंतिम ब्रेकथ्रू ब्लास्ट

कश्मीर और लद्दाख को सालभर जोड़ने वाली भारत की महत्वाकांक्षी जोजिला सुरंग परियोजना मंगलवार को एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचने जा रही है।

11,600 फीट से अधिक ऊंचाई पर निर्मित हो रही इस सुरंग में अंतिम ब्रेकथ्रू ब्लास्ट किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी शामिल होंगे।

दुनिया की सबसे लंबी दो-तरफा एकल सुरंगों में शामिल

करीब 13.15 किलोमीटर लंबी जोजिला सुरंग दुनिया की सबसे लंबी दो-तरफा एकल ट्यूब सड़क सुरंगों में से एक मानी जा रही है।

परियोजना पूरी होने के बाद श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग को हर मौसम में चालू रखने में मदद मिलेगी और लद्दाख की देश के बाकी हिस्सों से सालभर निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।

रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण परियोजना

जोजिला सुरंग का सामरिक महत्व भी काफी बड़ा है। यह सुरंग सेना की आवाजाही और सीमावर्ती क्षेत्रों तक रसद पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज और सुरक्षित बनाएगी।

पाकिस्तान और चीन सीमा से जुड़े क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने से सुरक्षा तैयारियों को भी मजबूती मिलेगी।

सर्दियों की चुनौतियों से मिलेगी राहत

वर्तमान में भारी बर्फबारी के कारण जोजिला दर्रा कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे आम लोगों और सुरक्षा बलों को

कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सुरंग के निर्माण के बाद इस समस्या का स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद है और

यात्रा समय भी काफी कम हो जाएगा।

NATM तकनीक से किया गया निर्माण

हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) द्वारा इस परियोजना का निर्माण किया जा रहा है।

सुरंग निर्माण में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का उपयोग किया गया है,

जिसे हिमालयी क्षेत्रों की जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों के लिए उपयुक्त माना जाता है।

कठिन परिस्थितियों में जारी रहा निर्माण कार्य

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में अत्यधिक बर्फबारी, हिमस्खलन और माइनस 30 डिग्री सेल्सियस

तक गिरते तापमान के बावजूद निर्माण कार्य लगातार जारी रखा गया। इस दौरान 1,200 से अधिक श्रमिकों ने चुनौतीपूर्ण

परिस्थितियों में काम किया।

हिमस्खलन और प्राकृतिक चुनौतियों का भी सामना

निर्माण अवधि के दौरान परियोजना स्थल पर कई बड़े हिमस्खलन हुए, जिनसे मशीनरी और अन्य संसाधनों को नुकसान पहुंचा।

जनवरी 2023 में भारतीय सेना ने हिमस्खलन में फंसे 172 से अधिक श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला था।

यात्रा समय तीन घंटे से घटकर 30 मिनट होगा

अधिकारियों के अनुसार सुरंग पूरी तरह तैयार होने के बाद जोजिला दर्रे को पार करने में लगने वाला समय वर्तमान के लगभग तीन घंटे से घटकर सिर्फ 30 मिनट रह जाएगा।

इससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

लद्दाख में खुशी का माहौल

लद्दाख की सांसद हनीफा जान ने परियोजना में हुई प्रगति पर खुशी जताते हुए कहा कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से इस सुरंग की मांग कर रहे थे।

उन्होंने इसे लद्दाख के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के विकास और संपर्क व्यवस्था को नई गति मिलेगी।

कनेक्टिविटी और विकास को मिलेगी नई दिशा

अधिकारियों का मानना है कि खुदाई का कार्य पूरा होने के बाद परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है।

सुरंग के संचालन में आने के बाद कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में निर्बाध संपर्क स्थापित होगा,

जिससे क्षेत्रीय विकास, आर्थिक गतिविधियों और सामरिक मजबूती को लंबे समय तक लाभ मिलेगा।

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