अब 1.35 लाख रुपये की होगी वसूली
दून अस्पताल में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा, आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज, जांच समिति गठित
दून अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
मामले में एक व्यक्ति के आयुष्मान कार्ड पर दूसरे मरीज का इलाज कराया गया।
फर्जीवाड़ा उस समय पकड़ा गया जब इलाज की फाइल बंद होने वाली थी। हालांकि तब तक मरीज की एंजियोप्लास्टी हो चुकी थी।
अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि उपचार पर खर्च हुए करीब 1.35 लाख रुपये संबंधित मरीज से वसूले जाएंगे।
प्रबंधन के अनुसार आरोपी इस राशि का भुगतान करने के लिए तैयार है। मामले को लेकर सोमवार को अस्पताल प्रशासन की कई बैठकें हुईं।
दूसरे व्यक्ति के आयुष्मान कार्ड पर हुआ इलाज
जानकारी के अनुसार मंजीत नामक व्यक्ति ने हृदय रोग के उपचार के लिए अपना आयुष्मान कार्ड इस्तेमाल किया था।
आरोप है कि बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद उसकी जगह विक्की नामक मरीज को डॉक्टर के पास भेजा गया।
इसके बाद मरीज की सभी जरूरी जांचें कराई गईं और उसे भर्ती कर उपचार दिया गया।
इलाज के दौरान मरीज की एंजियोप्लास्टी भी की गई। बाद में दस्तावेजों की जांच के दौरान पूरा मामला सामने आया।
आयुष्मान मित्र की सतर्कता से खुला मामला
बताया गया कि 29 मई को उपचार पूरा होने के बाद मंजीत खुद आयुष्मान काउंटर पर पहुंचा।
इसी दौरान आयुष्मान मित्र को संदेह हुआ और मामले की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को दी गई।
प्राथमिक जांच में पाया गया कि आयुष्मान कार्ड किसी और का था जबकि इलाज दूसरे व्यक्ति का किया गया।
इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी।
आरोपी के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी
अस्पताल प्रबंधन की तहरीर पर पुलिस ने मंजीत सिंह निवासी गोविंदगढ़ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है।
आरोप है कि 26 मई को मंजीत सिंह ने कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती होने के लिए अपना बायोमीट्रिक कराया था।
इसके बाद उसने अपनी जगह दूसरे मरीज को भर्ती कराकर उसका इलाज करवाया।
जांच के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति
मामले को गंभीर मानते हुए दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है।
तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विवेकानंद सत्यवाली करेंगे।
समिति में डॉ. वंदना बिष्ट और डॉ. पवनीश लोहान को भी शामिल किया गया है।
समिति को तीन कार्य दिवस के भीतर रिपोर्ट और सुधारात्मक सुझाव देने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राचार्य ने कहा कि जांच के दौरान आयुष्मान लाभार्थी सत्यापन, फोटो मिलान, आधार-बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल फर्जीवाड़े का नहीं बल्कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है।















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