देहरादून में तापमान 40.6°C तक पहुंचा था, अब बारिश से राहत; मानसून में कम वर्षा का अनुमान
देहरादून। नौतपा को साल के सबसे गर्म दिनों में माना जाता है, जब सूर्य अपनी तीव्रता के चरम पर होता है।
परंपरागत रूप से यह समय 9 दिनों का होता है और इस दौरान मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी पड़ती है।
इस अवधि में गर्म हवाएं, तापमान में बढ़ोतरी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आम मानी जाती हैं।
इस बार उत्तराखंड में नौतपा का मिजाज कुछ अलग रहा।
लगातार बारिश और बादलों की मौजूदगी के चलते कई इलाकों में गर्मी से राहत मिली है।
खासकर गढ़वाल और कुमाऊं के कई हिस्सों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।
देहरादून में 20 से 22 मई तक तापमान में उतार-चढ़ाव
मौसम विभाग के अनुसार 20 मई को देहरादून में इस सीजन का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया।
अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
इसके बाद 21 मई को तापमान घटकर करीब 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा,
जबकि 22 मई को यह लगभग 39.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
यह तीन दिन इस सीजन के सबसे गर्म दिनों में शामिल रहे, जब लोगों को तेज धूप और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ा।
26 से 29 मई तक बारिश से बदला मौसम
इसके बाद मौसम ने करवट ली और 26 मई से कई जिलों में बारिश दर्ज की गई।
पिथौरागढ़ और चमोली सहित कई पर्वतीय इलाकों में तापमान में गिरावट देखने को मिली।
29 मई को देहरादून में अधिकतम तापमान गिरकर 33.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
इसी दिन राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। कुछ क्षेत्रों में 70 मिलीमीटर तक वर्षा रिकॉर्ड की गई, जिससे गर्मी से बड़ी राहत मिली।
बारिश और ठंडी हवाओं के चलते 29 मई को मौसम काफी सुहाना बना रहा।
मौसम विभाग की चेतावनी: मानसून में कम बारिश की आशंका
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के मानसून पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान
सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
अनुमान के मुताबिक वर्षा सामान्य से करीब 10% तक कम रह सकती है, जिसमें ±4% की संभावित भिन्नता हो सकती है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि देश के अधिकांश हिस्सों में
अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है।
इसका अर्थ है कि आने वाले महीनों में गर्मी का असर सामान्य से अधिक देखने को मिल सकता है।
मानसून में गर्मी और कम बारिश का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है तो जून से सितंबर तक का मानसून सीजन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
बारिश कम होने के साथ-साथ तापमान अधिक रहने की संभावना भी जताई गई है।
हालांकि जम्मू-कश्मीर और असम के कुछ हिस्सों में सामान्य या बेहतर बारिश की संभावना है,
लेकिन देश के अधिकांश क्षेत्रों में औसत से कम वर्षा का अनुमान है।
प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह
मौसम विभाग और संबंधित एजेंसियों ने राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी है।
साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि वे आधिकारिक मौसम अपडेट पर ही भरोसा करें
और गर्मी तथा संभावित बारिश दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार रहें।













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