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बैकुंठ चतुर्दशी पर मुस्लिम समाज ने किया विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन

85 यूनिट रक्त संग्रह, 50 लोग स्टोरेज फुल होने से नहीं कर सके रक्तदान

बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर गुरुवार को मुस्लिम समाज श्रीनगर द्वारा मस्जिद परिसर में

भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।

बेस अस्पताल श्रीकोट के ब्लड बैंक में रक्त की कमी को देखते हुए आयोजित इस शिविर

में 85 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।

हालाँकि ब्लड बैंक का स्टोरेज फुल होने के कारण करीब 50 युवक-युवतियां रक्तदान

करने से वंचित रह गए, लेकिन लोगों में उत्साह और सेवा भावना देखते ही बनती थी।

सुबह से ही मस्जिद प्रांगण में रक्तदाताओं की लंबी कतारें लगी रहीं।

बेस अस्पताल ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सतीश और उनकी टीम सुबह से शाम तक

शिविर को सफल बनाने में जुटी रही।

शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, वरिष्ठ नागरिकों और प्रशासन के सहयोग से यह आयोजन अत्यंत सफल रहा।

रक्तदाताओं ने साझा की अपनी भावनाएँ

अफसा – मेकअप आर्टिस्ट व सैलून संचालिका

अफसा ने कहा कि रक्तदान के समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे किसी की

जिंदगी संवारने में प्रत्यक्ष योगदान दे रही हों। उन्होंने कहा “अगर मेरे रक्त की एक

बूंद भी किसी की जान बचा दे, तो इससे बड़ा सौभाग्य मेरे लिए और कुछ नहीं।”

फरदीन – सैलून संचालक

फरदीन ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी जताते हुए कहा

“रक्तदान ऐसा कार्य है जो सीधे किसी की जान बचाता है। इसलिए समाज के हर व्यक्ति को ऐसे आयोजनों में आगे आना चाहिए।”

इमरान – सेवा भावना से प्रेरित रक्तदाता

इमरान ने कहा “अगर मेरे खून से किसी जरूरतमंद की मदद हो जाए, तो यही मेरे लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है।”

इरशाद अहमद – सामाजिक रूप से सक्रिय नागरिक

इरशाद ने कहा “यह एक ऐसी पहल है जिसमें सभी को बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। यह मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।”

मोहम्मद आसिफ – फ्रूट जूस शॉप संचालक

मोहम्मद आसिफ ने अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा रक्तदान करते समय लगा कि सच में किसी की जिंदगी बचाने में योगदान दे रहा हूँ। यह मेरे लिए गर्व की बात है।

अंशिका – कपड़ों की दुकान में कार्यरत, पहली बार रक्तदान

पहली बार रक्तदान करने वाली अंशिका ने कहा रक्तदान बेहद उपयोगी है। यह जानकर खुशी होती है कि मैं भी किसी की जिंदगी में योगदान दे सकती हूँ।

नूर आलम – दैनिक मजदूर, मूल निवासी बिहार

नूर ने कहा मैं रोज़ मेहनत करता हूँ,

लेकिन आज लगा कि मैंने सच में किसी के लिए बड़ा काम किया है।

अगर मेरा रक्त किसी की जिंदगी बचा दे, तो यही मेरी असली कमाई है।

आयोजक निजमुल राव ने कहा

कई बार देखा है कि अस्पताल में समय पर रक्त न मिलने से मरीज को परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे में यदि हमारे छोटे से प्रयास से किसी की जान बच सकती है, तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं।”

रो. मोहम्मद आसिफ ने कहा कि “धीरे-धीरे लोगों में जागरूकता बढ़ रही है और यह मिथक टूट रहा है कि रक्तदान से कमजोरी होती है। कई लोग अपने जन्मदिन पर भी रक्तदान कर रहे हैं। मानवता दिल, इंसान और खून से ही जुड़ती है।”

कार्यक्रम में के.एन. मेठानी, प्रदीप तिवाड़ी, दिनेश असवाल, वासुदेव कंडारी, हिमांशु अग्रवाल, सूरज घिल्डियाल, बीरेंद्र नेगी, अनिल स्वामी, संजय फौजी, कुशलानाथ, राजीव विश्नोई, नरेश नौटियाल, बृजेश भट्ट, सूरज नेगी, कु. रश्मि, कुषुमलता, अनुराग चौहान, नगमा तौफीक, खिलेन्द्र चौधरी, मीना रावत, नितिन मलेठा, लाल सिंह नेगी, हरीलाल शाह, सुरेश मयाल, उज्जवल अग्रवाल सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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